पीएम मोदी का सबसे लंबा कार्यकाल: हरदीप पुरी ने गिनाईं उपलब्धियां, नेहरू को छोड़ा पीछे
पीएम मोदी का सबसे लंबा कार्यकाल: हरदीप पुरी ने गिनाईं उपलब्धियां, नेहरू को छोड़ा पीछे
NewsPoint•
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की उपलब्धियों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि मोदी के पास व्यापक ज्ञान है और वे विकास के विषयों पर अद्वितीय मार्गदर्शन देते हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए ही उन्होंने कई योजनाओं की नींव रखी थी।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लंबे कार्यकाल और उनकी उपलब्धियों की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण काम किए हैं। यह बात उन्होंने तब कही जब पीएम मोदी सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को पीछे छोड़ गए। पुरी ने कहा कि वे पीएम मोदी की टीम का हिस्सा रहे हैं और उन्होंने कई प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी जैसा व्यापक ज्ञान किसी और में नहीं देखा। विकास से जुड़े विषयों पर उनकी समझ और बड़े स्तर पर मार्गदर्शन देने की क्षमता वाकई कमाल की है।
मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि पीएम मोदी किसी भी विषय पर जब ध्यान केंद्रित करते हैं, तो उनका ज्ञान और शोध का तरीका बहुत ही खास होता है। चाहे बात प्राकृतिक गैस की हो, प्राकृतिक खेती की हो, या फिर खेती में उर्वरकों के इस्तेमाल की। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि साल 2014 में शुरू की गई कई योजनाओं की नींव तो पीएम मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए ही रख दी थी। स्वच्छता अभियान और शहरी विकास से जुड़ी कई पहलें उन्होंने गुजरात में छोटे स्तर पर शुरू की थीं।पुरी ने आगे बताया कि कई लोगों को लगता था कि जमीन जैसे मामले राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। लेकिन पीएम मोदी का मानना था कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर ऐसी योजनाएं बना सकती हैं जो देश को तेजी से विकसित भारत की ओर ले जाएं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी पहले ऐसे नेता हैं जिन्होंने वरिष्ठ स्तर पर खुद परियोजनाओं की निगरानी की व्यवस्था को मजबूत किया है। हर महीने होने वाली प्रगति समीक्षा बैठकों में वे अलग-अलग मंत्रालयों के सचिवों के साथ बैठकर परियोजनाओं की समीक्षा करते हैं। अगर किसी क्षेत्र में विशेषज्ञता की कमी दिखती है, तो वे उद्योग जगत के विशेषज्ञों से मदद लेने की सलाह देते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र में हुए कामों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में ऊर्जा क्षेत्र में जो काम हुए हैं, वे सिर्फ सरकारी बैठकों तक सीमित नहीं रहे। इसके लिए उद्योग जगत के साथ मिलकर खूब चर्चाएं की गईं। प्राकृतिक गैस, एलपीजी उपभोक्ताओं को पाइप वाली गैस से जोड़ने और तेल व गैस की खोज और उत्पादन की नीति में बदलाव जैसे विषयों पर भी बात हुई।
पुरी ने बताया कि पीएम मोदी के कार्यभार संभालने से पहले खनन क्षेत्र (कोयला, खनिज और पेट्रोलियम) से जुड़े कानूनों और नीतियों में बड़े सुधार की जरूरत महसूस की जा रही थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस दिशा में नए कानून और नीतिगत बदलाव लागू किए। देश के सेडिमेंटरी बेसिन (जहां तेल और गैस के भंडार हो सकते हैं) के करीब 35 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर ऐसा था जहां तेल या गैस की खोज या कुएं खोदने की इजाजत नहीं थी। सरकार ने उद्योग जगत से बात की और इस मामले में पीएम मोदी ने खुद आगे बढ़कर नेतृत्व किया।
मंत्री ने यह भी बताया कि रक्षा मंत्रालय, नौसेना, तटरक्षक बल और डीआरडीओ की ओर से भी इस मामले में कुछ आपत्तियां थीं। लेकिन अंततः नीतिगत बदलाव किए गए, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत रुचि और योगदान बहुत महत्वपूर्ण रहा।
ड्रोन तकनीक का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि जब वे नागरिक उड्डयन मंत्रालय से जुड़े थे, तब दुनिया में ड्रोन तकनीक बहुत तेजी से आगे बढ़ रही थी। सुरक्षा एजेंसियों को चिंता थी कि ड्रोन उड़ाने की इजाजत देने से मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। लेकिन पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत लगातार हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, “मैं अपने मन की कुछ बातें शेयर करना चाहता हूं। Prime Minister मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल में मैं नौ वर्षों से उनकी टीम का हिस्सा रहा हूं। यह मेरा नौवां वर्ष है। मैंने India में कई प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया है और अन्य देशों के Political नेतृत्व को भी करीब से देखा है। आज तक मैंने ऐसा कोई व्यक्ति नहीं देखा, जिसके पास Prime Minister मोदी जैसा व्यापक ज्ञान हो। विकास से जुड़े विषयों पर उनकी समझ और बड़े स्तर पर मार्गदर्शन देने की क्षमता अद्वितीय है।”
मंत्री ने आगे कहा, “चाहे प्राकृतिक गैस का विषय हो, प्राकृतिक खेती, कृषि या उर्वरकों के उपयोग का मामला हो, Prime Minister जिस विषय पर ध्यान केंद्रित करते हैं, उस पर उनका ज्ञान और शोध उल्लेखनीय होता है।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि “वर्ष 2014 में शुरू की गई कई योजनाओं की नींव Prime Minister मोदी ने Gujarat के Chief Minister रहते हुए पहले ही रख दी थी। स्वच्छता अभियान और शहरी विकास से जुड़ी कई पहलें उन्होंने Gujarat में छोटे स्तर पर लागू की थीं।”
मंत्री ने बताया, “कई लोगों का मानना था कि भूमि जैसे विषय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, लेकिन Prime Minister का विचार था कि केंद्र और राज्य Governmentें मिलकर ऐसी योजनाएं बना सकती हैं, जो देश को विकसित India की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाएं।”
उन्होंने कहा कि “Prime Minister मोदी पहले ऐसे नेता हैं, जिन्होंने वरिष्ठ स्तर पर स्वयं परियोजनाओं की निगरानी की व्यवस्था को मजबूत किया। हर महीने होने वाली प्रगति समीक्षा बैठकों में वे विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों के साथ बैठकर अलग-अलग परियोजनाओं की समीक्षा करते हैं। यदि किसी क्षेत्र में विशेषज्ञता की कमी दिखाई देती है, तो वे उद्योग जगत के विशेषज्ञों से सहयोग लेने की सलाह देते हैं।”
उन्होंने कहा कि “ऊर्जा क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जो कार्य हुए हैं, वे केवल सरकारी बैठकों तक सीमित नहीं रहे। इसके लिए उद्योग जगत के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया। प्राकृतिक गैस, एलपीजी उपभोक्ताओं को पाइप्ड गैस नेटवर्क से जोड़ने तथा अन्वेषण एवं उत्पादन नीति में बदलाव जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।”
मंत्री ने बताया कि “Prime Minister मोदी के कार्यभार संभालने से पहले खनन क्षेत्र (कोयला, खनिज और पेट्रोलियम) से जुड़े कानूनों और नीतियों में व्यापक सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। उन्होंने कहा कि Government ने इस दिशा में नए कानून और नीतिगत बदलाव लागू किए। देश के सेडिमेंटरी बेसिन के लगभग 35 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से करीब 10 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र ऐसा था, जहां अन्वेषण या कुएं खोदने की अनुमति नहीं थी। Government ने उद्योग जगत से चर्चा की और इस मामले में Prime Minister मोदी ने व्यक्तिगत स्तर पर नेतृत्व किया।”
उन्होंने बताया कि “रक्षा मंत्रालय, नौसेना, तटरक्षक बल और डीआरडीओ की ओर से भी इस विषय पर कई आपत्तियां थीं। उन्होंने कहा कि अंततः नीतिगत बदलाव किए गए, जिनमें Prime Minister Narendra Modi की व्यक्तिगत रुचि और योगदान महत्वपूर्ण रहा।”
ड्रोन तकनीक का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि “जब वे नागरिक उड्डयन मंत्रालय से जुड़े थे, तब दुनिया में ड्रोन तकनीक तेजी से विकसित हो रही थी। सुरक्षा एजेंसियों ने आशंका जताई थी कि ड्रोन संचालन की अनुमति देने से चुनौतियां पैदा हो सकती हैं, लेकिन पीएम मोदी के नेतृत्व में India लगातार हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।”