365 लोगों ने 21 किमी साइकल चला किया नारी शक्ति को सलाम

नवभारत टाइम्स

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर फरीदाबाद में नारी शक्ति को सलाम करते हुए 365 लोगों ने 21 किलोमीटर साइकल चलाकर स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश दिया। एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज द्वारा आयोजित इस साइक्लोथॉन में दिल्ली-एनसीआर से प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। 10 से 79 वर्ष के लोगों ने इसमें भाग लिया। अभिनेत्री ईशा गुप्ता भी मौजूद रहीं।

365 people saluted women power by cycling 21 km on international womens day
फरीदाबाद में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक साइक्लोथॉन का आयोजन किया। इस साइकल रेस में दिल्ली-एनसीआर से करीब 365 लोगों ने हिस्सा लिया। 10 और 21 किलोमीटर की इस दौड़ में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सबने जोश दिखाया। एशियन अस्पताल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. एनके पांडेय ने हरी झंडी दिखाकर इस कार्यक्रम की शुरुआत की। इस मौके पर अस्पताल के डायरेक्टर अनुपम पांडेय, इंटरनेशनल पेशंट विभाग की डायरेक्टर नेहा पांडेय, प्रिवेंटिव हेल्थ विभाग के डायरेक्टर डॉ. पीएस आहूजा, मार्केटिंग हेड शैलेश कुमार झा और अस्पताल के कई वरिष्ठ सदस्य मौजूद रहे।

सुबह 6:15 बजे अस्पताल से 21 किलोमीटर की साइकल रेस शुरू हुई। प्रतिभागियों ने ताज वेदांता होटल से आगे कांत एन्क्लेव तक जाकर वापस अस्पताल का रुख किया। वहीं, 10 किलोमीटर की रेस के धावक अनंगपुर से साइकल चलाते हुए अस्पताल पहुंचे। सभी प्रतिभागियों की सुरक्षा और सुविधा का खास ध्यान रखा गया। पूरे रास्ते नर्सिंग स्टाफ, एम्बुलेंस, फिजियोथेरेपिस्ट और पानी व जूस के काउंटर लगाए गए थे।
डॉ. एनके पांडेय ने कहा, "महिला दिवस के अवसर पर आयोजित यह साइक्लोथॉन समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।" उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में 10 साल से लेकर 79 साल तक के लोगों ने भाग लिया। प्रतियोगिता को दो आयु वर्गों में बांटा गया था: 10 से 40 वर्ष और 40 से 80 वर्ष। सभी प्रतिभागियों को टी-शर्ट, मेडल, ट्रैकिंग चिप और रिफ्रेशमेंट्स दिए गए।

इस खास मौके पर मौजूद जानी-मानी अभिनेत्री ईशा गुप्ता ने कहा, "महिला दिवस पर इस तरह का फिटनेस कार्यक्रम आयोजित करना एक बेहतरीन पहल है। साइक्लिंग एक शानदार गतिविधि है, जो शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है।" कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों और दर्शकों के लिए 'राहगीरी' का भी आयोजन किया गया। इसमें जुम्बा और भंगड़ा जैसी ऊर्जावान गतिविधियों ने माहौल को और भी जोशपूर्ण बना दिया।

यह साइक्लोथॉन सिर्फ एक रेस नहीं थी, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति एक बड़ा संदेश था। लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और दिखाया कि वे अपनी सेहत को लेकर कितने गंभीर हैं। साइक्लिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर हम न सिर्फ खुद को फिट रख सकते हैं, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं। इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव लाते हैं और लोगों को एक स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने इस पहल से एक मिसाल कायम की है।