Future Wars Instant Intelligence Covert Operations And Modern Weapons Are Key To Victory
भविष्य में युद्ध की कैसी होनी चाहिए तैयारी
नवभारत टाइम्स•
आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप बदल रहा है। अब वही देश विजयी होगा जो तुरंत खुफिया जानकारी जुटा सके। दुश्मन से छिपकर वार करने की क्षमता और आधुनिक हथियारों का होना जीत की कुंजी बनेगा। अमेरिका और ईरान के हालिया सैन्य अभियानों ने भविष्य की जंगों की झलक दिखाई है।
साल की शुरुआत में अमेरिका द्वारा की गई दो बड़ी सैन्य कार्रवाइयों ने साफ कर दिया है कि भविष्य की लड़ाई का तरीका बदल गया है। अब वही देश जंग जीत पाएगा जिसके पास तुरंत खुफिया जानकारी होगी, जो दुश्मनों से छिपकर वार कर सके और जिसके पास मजबूत, आधुनिक और किफायती हथियार होंगे। ये बातें अब युद्ध में जीत-हार तय करेंगी।
जनवरी में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए 'ऑपरेशन एब्सॉल्यूट रिजॉल्व' चलाया। इसमें स्पेशल फोर्स और दुश्मन की तकनीक को बेकार करने वाले इलेक्ट्रॉनिक हथियारों का इस्तेमाल हुआ। यह ईरान पर इस्राइल के साथ मिलकर किए गए हमलों से अलग था, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को निशाना बनाया गया था। इन दोनों घटनाओं से यह साफ हो गया कि आने वाले समय में पारंपरिक सैन्य अभियानों की जगह नई तकनीकें लेंगी। जो देश नई तकनीक तक पहुंच रखेगा, वही जीतेगा।ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम (हवाई सुरक्षा प्रणाली) नए जमाने के जहाजों और लंबी दूरी की मिसाइलों के सामने टिक नहीं पाया। इससे दुनिया को पता चला कि अमेरिका ने अपने मिसाइल सिस्टम में ऐसे बदलाव किए हैं, जिन्हें पकड़ना और भी मुश्किल हो गया है। रूस का एस 300/400 एयर डिफेंस सिस्टम भी इन हमलों को रोकने में नाकाम रहा। कुछ तस्वीरों में मिसाइलों के आगे के झुके हुए विंग्स (पंख) दिखे, जो शायद रडार से बचने में मदद करते होंगे। इराक से आए कुछ वीडियो में यह भी दिखा कि एक दर्जन से ज्यादा मिसाइलें बहुत कम ऊंचाई पर उड़ते हुए ईरान की ओर बढ़ रही थीं। वेनेजुएला में भी एयर डिफेंस सिस्टम फेल हो गया था और अमेरिकी हेलिकॉप्टर सीधे राष्ट्रपति के घर में घुस गया था।
युद्ध की लागत को देखते हुए ऐसा लगता है कि अमेरिका ने ईरानी डिफेंस को निष्क्रिय करने के लिए आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल किया। ये मिसाइलें भारत की ब्रह्मोस मिसाइलों की तुलना में काफी सस्ती होती हैं।
इस साल की इन दोनों सैन्य कार्रवाइयों से यह सबक मिला कि रियल टाइम इंटेलिजेंस (तुरंत मिलने वाली खुफिया जानकारी) किसी भी ऑपरेशन को सफल बना सकती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब इलेक्ट्रॉनिक इंटरसेप्ट (इलेक्ट्रॉनिक संदेशों को रोकना), सैटेलाइट डेटा (उपग्रहों से मिली जानकारी), ड्रोन इमेजरी (ड्रोन से ली गई तस्वीरें) और ग्राउंड रिपोर्ट (जमीनी रिपोर्ट) जैसी भारी-भरकम जानकारियों को समझने में अहम भूमिका निभा रहा है। अमेरिका के पास कई जासूसी सैटेलाइट हैं और वह इन्हें और बढ़ाने की योजना बना रहा है। स्पेस (अंतरिक्ष) क्षमता में उसके सबसे करीब चीन है।
संदेश बिल्कुल साफ है - स्टेल्थ (दुश्मन की नजरों से छिपकर वार करने की क्षमता), रियल-टाइम इंटेल (तुरंत मिलने वाली खुफिया जानकारी) और किफायती हथियारों में निवेश किए बिना भविष्य की लड़ाइयों में बढ़त हासिल करना मुश्किल होगा।