Sharp Rise In Prices Of Edible Oils Dates And Almonds Know The Reason
थोक में बढ़े खाने के तेल के दाम, खजूर-बादाम भी चढ़े
नवभारत टाइम्स•
खाने के तेल की कीमतों में पांच प्रतिशत तक की तेजी आई है। शिकागो और मलेशिया-इंडोनेशिया के वायदा बाजारों में मजबूती इसका कारण है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से बायोडीजल की मांग बढ़ी है, जिससे खाने के तेल की सप्लाई कम हो गई है।
सोमवार को थोक बाज़ार में खाने के तेल की कीमतों में 5% तक का उछाल देखा गया। इसकी मुख्य वजह शिकागो में सोयाबीन तेल और मलेशिया-इंडोनेशिया में पाम ऑयल के वायदा बाज़ार में आई तेज़ी है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने के कारण इन तेलों की कीमतें बढ़ी हैं। साथ ही, सप्लाई में रुकावट आने से ड्राई फ्रूट्स भी महंगे हो गए हैं।
ET की रिपोर्ट के अनुसार, जब भी कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो बायोडीजल बनाने के लिए सोयाबीन और पाम ऑयल का इस्तेमाल ज़्यादा होने लगता है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। इससे बायोडीजल की मांग बढ़ गई है। नतीजतन, खाने के तेल की सप्लाई कम हो गई है। व्यापारियों का कहना है कि युद्ध के कारण सप्लाई रुकने और कीमतें बढ़ने के डर से लोग ज़्यादा तेल खरीद रहे हैं। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (महाराष्ट्र) के सचिव शंकर ठक्कर ने कहा है कि थोक बाज़ार में आए इस बदलाव का असर आम लोगों के लिए रिटेल कीमतों पर दिखने में अभी कुछ हफ्ते लगेंगे।सिर्फ तेल ही नहीं, ड्राई फ्रूट्स का बाज़ार भी महंगा हो गया है। आमतौर पर रमज़ान में रोज़े खोलने के लिए इस्तेमाल होने वाले खजूर की कीमतें 10-20% तक बढ़ गई हैं। ईरान, अफगानिस्तान और यूएई जैसे ट्रेडिंग सेंटर्स से सप्लाई में दिक्कत आने की वजह से लोकल मार्केट में खजूर की कमी हो गई है। व्यापारियों का कहना है कि सैन्य संघर्ष शुरू होने के बाद से खजूर, बादाम, पिस्ता और अंजीर के दाम भी बढ़ गए हैं।
खासकर खाने के तेल की कीमतों में आई तेज़ी की वजह को समझना ज़रूरी है। जब कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो कंपनियाँ बायोडीजल बनाने के लिए सोयाबीन और पाम ऑयल जैसे तेलों का ज़्यादा इस्तेमाल करती हैं। बायोडीजल एक तरह का ईंधन है जो वनस्पति तेलों से बनता है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं, जिससे बायोडीजल की मांग बढ़ गई है। इस वजह से, खाने के लिए इस्तेमाल होने वाले तेल की उपलब्धता कम हो गई है और कीमतें बढ़ गई हैं।
व्यापारियों का कहना है कि लोग युद्ध की वजह से सप्लाई रुकने और भविष्य में कीमतें और बढ़ने के डर से अभी से ज़्यादा मात्रा में तेल खरीद रहे हैं। यह भी एक कारण है कि तेल की मांग अचानक बढ़ गई है और कीमतें ऊपर जा रही हैं।
शंकर ठक्कर, जो कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (महाराष्ट्र) के सचिव हैं, ने बताया कि थोक बाज़ार में जो कीमतें बढ़ी हैं, उनका असर आम लोगों तक पहुँचने में थोड़ा समय लगेगा। यानी, दुकानों में जो तेल और ड्राई फ्रूट्स बिकते हैं, उनकी कीमतें बढ़ने में कुछ हफ्ते लग सकते हैं।
सिर्फ खाने का तेल ही नहीं, ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में भी इज़ाफ़ा हुआ है। रमज़ान के महीने में खजूर का इस्तेमाल बहुत होता है। इस बार खजूर की कीमतें 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि ईरान, अफगानिस्तान और यूएई जैसे देशों से खजूर की सप्लाई में रुकावट आ रही है। इन देशों से खजूर भारत आता है, लेकिन वहां की समस्याओं के कारण माल कम पहुँच रहा है।
व्यापारियों के मुताबिक, सैन्य संघर्ष शुरू होने के बाद से खजूर के साथ-साथ बादाम, पिस्ता और अंजीर जैसी चीज़ों के दाम भी बढ़ गए हैं। यह सब सप्लाई चेन में आई गड़बड़ी और बढ़ती मांग का नतीजा है।