The Cost Of War Us iran Conflict And Its Impact On The Global Economy
युद्ध की क़ीमत
नवभारत टाइम्स•
पश्चिम एशिया में अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध जारी है। इस संघर्ष से बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हो रहा है। युद्ध की लागत अरबों डॉलर में है और यह वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर रहा है। यूक्रेन और गाजा जैसे पिछले युद्धों से सबक लेना महत्वपूर्ण है।
अमेरिका-ईरान युद्ध ने पश्चिम एशिया में तबाही मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का कहना है कि यह लड़ाई चार से पांच हफ्ते चलेगी, लेकिन उनका देश लंबी लड़ाई के लिए भी तैयार है। वहीं, उनके डिप्टी जेडी वांस और इस्राइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू का मानना है कि युद्ध लंबा नहीं खिंचेगा। असल में, युद्ध लंबा न चले, इसी में सबकी भलाई है। लंबी लड़ाई से सिर्फ हथियार बनाने वाली कंपनियों को ही फायदा होता है।
इस युद्ध में भारी खर्च आ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने पहले 24 घंटों में ही ईरान के साथ संघर्ष पर करीब 72 अरब रुपये खर्च कर दिए। वॉरशिप, फाइटर जेट्स और एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती पर हर दिन अरबों रुपये खर्च हो रहे हैं। बमबारी से इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान का हिसाब अलग है, जबकि इंसानों को हुई क्षति की तो भरपाई ही नहीं हो सकती।ट्रंप, नेतन्याहू या किसी भी नेता के लिए युद्ध को किसी तय समय में बांधना नामुमकिन है। इन देशों का अपना पुराना अनुभव बताता है कि एक बार जंग शुरू हो जाए, तो उसे रोकना दूसरे पक्ष की सहमति पर भी निर्भर करता है, भले ही उसे कितना भी कमजोर क्यों न समझा जाए। यूक्रेन और गाजा में हुए नुकसान और गलत आकलन इसके बड़े उदाहरण हैं।
यूक्रेन युद्ध की अनुमानित लागत अब तक 2.5 ट्रिलियन डॉलर बताई जा रही है। यूक्रेन को हुए नुकसान की भरपाई के लिए अगले दस साल में 588 अरब रुपयों की जरूरत पड़ेगी। युद्ध की वजह से विकास और दूसरी जरूरी चीजें पीछे छूट जाती हैं, जैसा कि रूस और यूक्रेन के साथ हो रहा है। दोनों देशों की GDP का एक बड़ा हिस्सा सैन्य बजट पर जा रहा है। अगर अमेरिका और यूरोप यूक्रेन में फंसे हैं, तो इस्राइल गाजा में। 80 से 90% इमारतों को तबाह करने के बावजूद, इस्राइल आज भी यह दावा नहीं कर सकता कि उसने गाजा में अपने लक्ष्य हासिल कर लिए हैं।
ईरान संकट इन सब से कहीं ज्यादा गंभीर है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें तेजी से ऐसे नए इलाके शामिल हो रहे हैं, जो दुनिया भर में तेल की सप्लाई के लिए बहुत अहम हैं। क्रूड ऑयल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और आशंका है कि यह 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। तेल का दाम सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहता, यह देशों की आर्थिक स्थिरता से जुड़ा होता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था , जो पहले से ही उथल-पुथल का शिकार रही है, वह ईरान के संघर्ष को लंबे समय तक झेल नहीं सकती।
युद्ध की वजह से सिर्फ देशों का पैसा ही नहीं डूबता, बल्कि लोगों का जीवन भी बर्बाद हो जाता है। यूक्रेन और गाजा के हालात देखकर यह साफ है कि युद्ध किसी के लिए भी फायदेमंद नहीं होता। हथियार बनाने वाली कंपनियां भले ही कुछ समय के लिए मालामाल हो जाएं, लेकिन आम जनता को सिर्फ तबाही और बर्बादी ही मिलती है।
यह समझना बहुत जरूरी है कि युद्ध कोई खेल नहीं है। एक बार शुरू होने के बाद, इसे रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है। नेताओं को यह समझना चाहिए कि वे जो फैसले ले रहे हैं, उसका असर सिर्फ आज पर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ेगा। इसलिए, शांति बनाए रखना ही सबसे समझदारी का काम है।