3D प्रिंटिंग से बनेंगे दिव्यांगों के अंग

नवभारत टाइम्स

डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय दिव्यांगों के जीवन को बेहतर बनाने जा रहा है। विश्वविद्यालय में 3D प्रिंटिंग लैब स्थापित हो रही है। इससे दिव्यांगों के लिए हल्के और सटीक कृत्रिम अंग बनेंगे। यह सुविधा प्रदेश के दिव्यांगों को पूरी तरह नि:शुल्क मिलेगी। यह तकनीक अंग निर्माण को तेज और किफायती बनाएगी।

lightweight and precise artificial limbs for disabled to be made with 3d printing free facility in lucknow
लखनऊ: डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय अब दिव्यांगजनों के जीवन को आसान बनाने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल करने जा रहा है। विश्वविद्यालय के 'कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केंद्र ' में एक अत्याधुनिक 3D प्रिंटिंग लैब लगाई जा रही है। इस लैब में दिव्यांगों के लिए ऐसे कृत्रिम अंग बनाए जाएंगे जो हल्के होंगे और शरीर के हिसाब से एकदम फिट बैठेंगे। सबसे अच्छी बात यह है कि ये कृत्रिम अंग प्रदेश के दिव्यांगों को बिल्कुल मुफ्त में मिलेंगे।

यह कदम दिव्यांगजनों के लिए बहुत बड़ी राहत लेकर आया है। अब तक कृत्रिम अंग बनाने में काफी समय और पैसा लगता था। लेकिन 3D प्रिंटिंग तकनीक से यह काम बहुत तेजी से और कम खर्च में हो जाएगा। विश्वविद्यालय ने इसके लिए 3D प्रिंटिंग मशीन खरीद ली है और लैब बनाने का काम भी चल रहा है।
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की मदद से डॉ. शकुंतला विश्वविद्यालय में कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केंद्र पहले से ही चल रहा है। यहां दिव्यांगों को मुफ्त में कृत्रिम अंग दिए जाते हैं। लेकिन अब 3D प्रिंटिंग तकनीक आने से यह सुविधा और भी बेहतर हो जाएगी।

यह नई तकनीक दिव्यांगों के लिए वरदान साबित होगी, खासकर उन लोगों के लिए जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। अब उन्हें महंगे कृत्रिम अंगों के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। विश्वविद्यालय की यह पहल दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने में एक महत्वपूर्ण कदम है।

3D प्रिंटिंग एक ऐसी तकनीक है जिसमें कंप्यूटर की मदद से किसी चीज का 3D मॉडल बनाकर उसे परत दर परत असली रूप दिया जाता है। इससे ऐसे अंग बनाए जा सकते हैं जो बिल्कुल असली जैसे दिखते हैं और काम करते हैं। यह तकनीक पहले सिर्फ बड़ी कंपनियों में इस्तेमाल होती थी, लेकिन अब यह विश्वविद्यालयों में भी आ गई है।