45 Indians Troubled By Sleep Deprivation Know Symptoms And Prevention
45% लोग ठीक से सो नहीं पाते
नवभारत टाइम्स•
दुनिया भर में करीब 93 करोड़ वयस्क नींद की बीमारी ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से जूझ रहे हैं। भारत में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। नींद की कमी से थकान, चिड़चिड़ापन और कार्य क्षमता में कमी आती है। यह हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
दुनिया भर में करीब 93 करोड़ वयस्क ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) से जूझ रहे हैं, जिनमें से 42 करोड़ लोगों को मध्यम से गंभीर समस्या है। भारत में भी नींद से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जहां 45% लोग नींद की कमी से परेशान हैं। केजीएमयू के डॉ. वेद प्रकाश के अनुसार, OSA जैसी गंभीर बीमारियों का समय पर पता न चलने से हर साल भारी आर्थिक नुकसान होता है और यह हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, मधुमेह, डिप्रेशन और स्ट्रोक जैसी बीमारियों को न्योता दे सकती है। पॉलिसोम्नोग्राफी (स्लीप स्टडी) OSA की सबसे सटीक जांच मानी जाती है।
नींद की कमी और नींद से जुड़े विकार हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। विश्व स्तर पर लगभग 10% वयस्क अनिद्रा से पीड़ित हैं, जो नींद न आने की एक आम समस्या है। वहीं, 3 से 7% वयस्क OSA से ग्रस्त हैं। यह समस्या अक्सर तेज खर्राटों और सोते समय सांस रुकने के कारण होती है। डॉ. वेद प्रकाश, जो केजीएमयू में पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन (PCCM) के विभागाध्यक्ष हैं, बताते हैं कि भारत में भी OSA और अन्य नींद संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।भारत में स्थिति भी चिंताजनक है। रेस्टलेस लेग सिंड्रोम (पैरों में बेचैनी) करीब 2 से 3% लोगों में पाया जाता है। इसके अलावा, 4 से 5% लोग नींद में चलने या बोलने की समस्या से परेशान हैं। सबसे आम समस्या नींद की कमी है, जिसके दुष्प्रभाव लगभग 45% लोग महसूस करते हैं। इन दुष्प्रभावों में दिन में थकान, चिड़चिड़ापन, याददाश्त कमजोर होना और काम करने की क्षमता में कमी शामिल है।
OSA के प्रमुख लक्षण क्या हैं? अगर आपको दिन में बहुत नींद आती है, रात में सोने में दिक्कत होती है, या सोते समय बार-बार नींद खुल जाती है, तो यह OSA का संकेत हो सकता है। तेज खर्राटे लेना, नींद में दम घुटने जैसा महसूस होना, सुबह सिरदर्द होना, लगातार थकान और चिड़चिड़ापन भी इसके लक्षण हैं।
डॉक्टर इन समस्याओं का पता लगाने के लिए कई तरीके अपनाते हैं। वे मरीज से उसकी बीमारी का इतिहास पूछते हैं, स्लीप डायरी (नींद की डायरी) बनवाते हैं, शारीरिक जांच करते हैं और STOP-BANG या ESS जैसे स्क्रीनिंग टूल्स का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन OSA की सबसे सटीक जांच 'स्लीप स्टडी' या 'पॉलिसोम्नोग्राफी' है। यह एक ऐसी जांच है जिसमें सोते समय आपके शरीर की कई चीजों पर नजर रखी जाती है, जैसे कि आपकी सांस, दिल की धड़कन और दिमाग की गतिविधि।
यह समझना बहुत जरूरी है कि नींद की कमी सिर्फ थकान नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों की जड़ हो सकती है। OSA जैसी समस्याएं अगर अनियंत्रित रह जाएं तो हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारियां, डायबिटीज, डिप्रेशन और यहां तक कि स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ा सकती हैं। इसलिए, नींद से जुड़ी किसी भी समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए और समय पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।