दांडी मार्च की याद में एलयू में निकाली पदयात्रा

नवभारत टाइम्स

लखनऊ विश्वविद्यालय में महात्मा गांधी के दांडी मार्च की याद में एक पदयात्रा निकाली गई। इसका उद्देश्य युवाओं को गांधीजी के आदर्शों से जोड़ना था। पदयात्रा जनभवन से शुरू होकर विश्वविद्यालय पहुंची। वहां राष्ट्रपिता की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। मालवीय सभागार में एक कार्यक्रम हुआ। इसमें वक्ताओं ने दांडी मार्च और एनईपी-2020 पर अपने विचार रखे।

dandi march commemorated with a foot march at lu effort to connect youth with developed india 2047
लखनऊ: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश पर लखनऊ विश्वविद्यालय (एलयू) में महात्मा गांधी के ऐतिहासिक दांडी मार्च की याद में एक प्रतीकात्मक पदयात्रा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को गांधीजी के सत्य, स्वदेशी और स्वावलंबन जैसे आदर्शों से जोड़ना था। साथ ही, उन्हें ' विकसित भारत 2047 ' के राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाना भी एक अहम लक्ष्य था। यह पदयात्रा सुबह 8:30 बजे जनभवन से शुरू होकर विभिन्न रास्तों से गुजरते हुए 9:40 बजे एलयू पहुंची। वहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर उन्हें नमन किया गया। इसके बाद मालवीय सभागार में एक मुख्य कार्यक्रम हुआ, जिसमें कुलपति और अन्य वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का संचालन प्रो. अलका पांडे ने किया। इस सत्र में छात्र अनमोल गोयल, मानस वाजपेयी और छात्रा अलीना वकार ने दांडी मार्च के पीछे की कहानी और नई शिक्षा नीति (NEP-2020) की प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए। डॉ. पंकज एल. अजानी ने एक कविता के माध्यम से नमक सत्याग्रह के महत्व को समझाया। वहीं, अशोक देसाई ने गांधी-इरविन समझौते और इस आंदोलन के बड़े असर के बारे में बात की। डॉ. सुधीर एम. बोबडे ने एक खास बात बताई कि इसी सभागार में कभी महात्मा गांधी ने छात्रों को संबोधित किया था। यह आयोजन युवाओं को देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से किया गया था। दांडी मार्च, जो नमक कानून के विरोध में एक अहिंसक आंदोलन था, आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। युवाओं को इस इतिहास से जोड़कर उन्हें भविष्य के भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।