खबर छपी तो 15 दिन पहले बना दी कामचलाऊ सड़क

नवभारत टाइम्स

नूंह के शिकरावा गांव में लोक निर्माण विभाग पर सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप है। करीब 13 लाख रुपये की राशि कागजों में खर्च दिखाई गई। एनबीटी में खबर छपने के बाद विभाग ने आनन-फानन में सड़क की मरम्मत कराई। ग्रामीणों का संदेह है कि सरकारी पैसे का बंदरबांट हुआ है। उच्चाधिकारियों की चुप्पी भ्रष्टाचार को उजागर करती है।

corruption exposed pwd built makeshift road 15 days ago after news report
नूंह में बीजेपी सरकार के जीरो टॉलरेंस के दावों की पोल खुल गई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) में बैठे भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी मिलकर सरकारी पैसों की बंदरबांट कर रहे हैं। मामला पुन्हाना के शिकरावा गांव का है, जहां सड़क निर्माण के नाम पर करीब 13 लाख रुपये का गबन किया गया। यह पूरा खेल नवंबर 2025 में खेला गया, जब सड़क निर्माण का काम सिर्फ कागजों में पूरा दिखा दिया गया और पैसा ठेकेदार और अफसरों की जेब में चला गया। जब ग्रामीणों को इस धांधली का पता चला तो उन्होंने आवाज उठाई। NBT ने 31 जनवरी के अंक में इस खबर को प्रमुखता से छापा। खबर छपते ही जांच से बचने के लिए अधिकारी और ठेकेदार हरकत में आए और करीब 15 दिन पहले आनन-फानन में सड़क पर थोड़ी-बहुत मरम्मत करा दी। इससे विभाग पर सवाल और भी गहरे हो गए हैं।

असल में, साल 2022 के आखिरी महीनों में गांव से गुजरने वाले मुख्य रास्ते पर पानी की पाइपलाइन बिछाई गई थी। पाइपलाइन डालने के लिए सड़क को किनारे से खोदा गया, जिससे सड़क का एक हिस्सा बुरी तरह खराब हो गया। पाइपलाइन डालने से पहले ही जनस्वास्थ्य विभाग ने सड़क की मरम्मत के लिए लोक निर्माण विभाग को करीब 13 लाख रुपये दे दिए थे। लेकिन, सड़क की हालत वैसी ही खस्ता बनी रही। आरोप है कि लोक निर्माण विभाग ने अप्रैल 2025 में करीब 15 लाख रुपये का टेंडर निकाला और उसे लगभग 13 लाख रुपये में एक ठेकेदार को दे दिया। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल नवंबर में इस काम को कागजों में पूरा दिखा दिया गया, जबकि सड़क की मरम्मत हुई ही नहीं। विभागीय रिकॉर्ड में काम पूरा दिखाकर ठेकेदार को भुगतान भी कर दिया गया था।
जब NBT में इस मामले को लेकर खबर छपी, तो विभाग ने जांच से बचने के लिए फौरन सड़क के खुदे हुए हिस्से को भरने का काम शुरू कर दिया। इससे ग्रामीणों का शक और पक्का हो गया कि सड़क मरम्मत के नाम पर सरकारी पैसों का गलत इस्तेमाल हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यह काम सही ढंग से हुआ होता तो खबर छपने के बाद इतनी जल्दीबाजी में मरम्मत की जरूरत ही नहीं पड़ती। यह सब देखकर साफ लगता है कि भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश की जा रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों ने मिलकर इस पैसे को हड़प लिया। उन्होंने कहा, "जब एनबीटी में इसे लेकर खबर प्रकाशित हुई तो विभाग ने जांच से बचने के लिए आनन-फानन में सड़क के साथ खुदे हिस्से को भरने का प्रयास शुरू कर दिया।" इससे ग्रामीणों का संदेह और गहरा गया कि सड़क मरम्मत के नाम पर सरकारी राशि का बंदरबांट किया गया है। यह पूरा मामला सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार को उजागर करता है। जब उच्च अधिकारी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, तो यह साफ दिखाता है कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह स्थिति आम जनता के भरोसे को तोड़ने वाली है। सरकार भले ही जीरो टॉलरेंस की बात करे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। इस तरह के मामले सरकारी योजनाओं पर सवाल खड़े करते हैं और जनता के पैसे की बर्बादी का सीधा प्रमाण हैं।