संघर्ष और हिंसा रुके

नवभारत टाइम्स

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ रहा है। पाकिस्तान के हवाई हमलों से अफगान इलाकों में हालात बिगड़ रहे हैं। इस संघर्ष का सबसे बुरा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। डूरंड रेखा के पास रहने वाले लोग गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहे हैं।

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दुनिया का ध्यान जहाँ अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर है, वहीं अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच संघर्ष भी तेज हो गया है। पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों ने अफगान इलाकों में हालात को और बिगाड़ दिया है। इस टकराव का सबसे बुरा असर आम लोगों पर पड़ रहा है, खासकर महिलाओं और बच्चों पर। गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहे डूरंड रेखा के पास रहने वाले लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। ऐसे में दुनिया को इस ओर ध्यान देना चाहिए ताकि हिंसा रुके और लोगों की जान बचाई जा सके।

यह बात प्रबुद्ध रावत ने अपने ईमेल में कही है। उन्होंने 14 मार्च के संपादकीय 'एक युद्ध यह भी' का जिक्र करते हुए यह चिंता जताई है। रावत का कहना है कि जब बड़ी शक्तियों के बीच तनाव चल रहा है, तब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच का यह संघर्ष भी कम महत्वपूर्ण नहीं है।
पाकिस्तान की ओर से किए गए हवाई हमलों के कारण अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। इन हमलों से आम नागरिकों को भारी नुकसान हो रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और बच्चों को झेलनी पड़ रही है।

डूरंड रेखा के आसपास रहने वाले लोग पहले से ही गरीबी और बेरोजगारी से परेशान हैं। इस नए संघर्ष ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। वे लाचार और मजबूर महसूस कर रहे हैं।

इसलिए, प्रबुद्ध रावत ने विश्व बिरादरी से अपील की है कि वे इस मामले पर ध्यान दें। उनका कहना है कि हिंसा को तुरंत रोका जाना चाहिए और लोगों की जान बचाने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।