Ayodhya Diabetes Awareness Campaign Special Message Will Reach Villages
‘गांवों तक पहुंचे मधुमेह जागरूकता अभियान’
नवभारत टाइम्स•
अयोध्या में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज कार्यशाला का उद्घाटन हुआ। इसमें देश-विदेश के विशेषज्ञ मधुमेह के आधुनिक इलाज पर चर्चा कर रहे हैं। चंपत राय ने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की आवश्यकता बताई। एसएसपी ने तनावपूर्ण जीवनशैली को बीमारी का कारण बताया। नियमित व्यायाम और संतुलित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी गई। मेडिकल छात्रों के लिए क्विज प्रतियोगिता भी होगी।
अयोध्या में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज कार्यशाला का उद्घाटन रविवार को हुआ। इस कार्यशाला में देश-विदेश के करीब 1500 विशेषज्ञ चिकित्सक मधुमेह के नए इलाज, नई दवाओं और इसे रोकने के तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। चंपत राय ने कहा कि मधुमेह के बारे में गांवों तक जागरूकता फैलाना बहुत ज़रूरी है। वहीं, एसएसपी ने कहा कि आजकल की तनाव भरी ज़िंदगी इस बीमारी को बढ़ा रही है। उन्होंने नियमित व्यायाम और सही दिनचर्या अपनाने की सलाह दी। इस आयोजन में मेडिकल छात्रों के लिए एक क्विज प्रतियोगिता भी रखी गई है।
यह कार्यशाला रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (आरएसएसडीआई) द्वारा आयोजित की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य मधुमेह के क्षेत्र में हो रहे नए शोधों और उपचारों पर विचार-विमर्श करना है। विशेषज्ञ चिकित्सक यहां अपने अनुभव साझा करेंगे और नई तकनीकों पर चर्चा करेंगे।चंपत राय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि शहरी इलाकों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी लोगों को मधुमेह के खतरों और बचाव के तरीकों के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर बीमारी है और इसके प्रति जागरूकता बहुत ज़रूरी है।
एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि आज की भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण जीवनशैली लोगों को बीमार बना रही है। उन्होंने कहा कि मधुमेह जैसी बीमारियां इसी वजह से बढ़ रही हैं। उन्होंने सभी को सलाह दी कि वे अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएं। नियमित रूप से व्यायाम करें और अपने खान-पान का ध्यान रखें। एक संतुलित दिनचर्या अपनाने से कई बीमारियों से बचा जा सकता है।
इस कार्यशाला में मेडिकल के छात्रों को भी शामिल किया गया है। उनके लिए एक क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। यह छात्रों के ज्ञान को बढ़ाने और उन्हें मधुमेह के बारे में और अधिक सिखाने का एक अच्छा अवसर होगा।