नेपाल को कितना बदल पाएंगे बालेन

नवभारत टाइम्स

नेपाल में पहली बार किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला है। काठमांडू के मेयर बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनाया गया है। यह बदलाव राजनीतिक अस्थिरता को दूर करेगा। जनता की उम्मीदें बढ़ी हैं। बालेन और लमिछाने को देश की समस्याओं को सुलझाना होगा। महंगाई, बेरोजगारी और विदेशी मुद्रा की कमी जैसी चुनौतियां हैं। सिस्टम में सुधार की जरूरत है।

balen shah and rabi lamichhane the rise and challenges of nepals new era
नेपाल की राजनीति में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम देखने को मिला है, जहाँ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने पहली बार अकेले दम पर प्रचंड बहुमत हासिल कर लिया है। चार साल पुरानी यह पार्टी, जिसके नेता रबि लमिछाने हैं, ने 2022 के संसदीय चुनाव में भी अच्छा प्रदर्शन किया था और तब से लेकर अब तक बनी चार में से तीन सरकारों में उनकी हिस्सेदारी रही है। हालांकि, आज की पूर्ण बहुमत वाली RSP अपने पिछले स्वरूप से काफी अलग है। इस बार, पार्टी ने प्रधानमंत्री पद के लिए काठमांडू के मेयर बालेन शाह जैसे व्यक्ति को आगे किया है, जिनकी नेपाली राजनीति में एक बेदाग छवि है और किसी स्थापित राजनीतिक दल से उनका जुड़ाव नहीं माना जाता। यह एक ऐसा मौका था जब एक छोटे राजनीतिक दल ने युवा आंदोलन का फायदा उठाने के लिए खुद को पूरी तरह खोल दिया। बालेन और लमिछाने दोनों का जुड़ाव पॉपुलर कल्चर से रहा है और जेन Z (Gen Z) उनके स्टेज परफॉर्मेंसेज की रील्स देखती रही है। यह जीत नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता को कम करने की उम्मीद जगाती है।

नेपाल की जनता ने लोकतंत्र के रास्ते पर चलने का फैसला किया है। इंटरनेट उपलब्धता को लेकर जेन Z के आंदोलन से ठीक पहले तक राजतंत्र समर्थक ताकतें सक्रिय थीं और यह संदेह था कि कहीं वे सियासी पार्टियों से हो रहे मोहभंग का फायदा उठाकर राजशाही को दोबारा सत्ता में न ले आएं। लेकिन, जनता ने लोकतंत्र को चुना है और अब राजा के लिए करने को कुछ खास नहीं बचा है।
जनता के स्तर पर एक और बड़ी चिंता कर्जों की अदायगी को लेकर थी। नेपाल में ब्याज दरें भारत से भी ज्यादा हैं, और कुर्की-जब्ती की खबरें लोगों को परेशान कर रही थीं। इसके अलावा, महंगाई और बेरोजगारी दो ऐसे बड़े मुद्दे हैं जिनका सीधा संबंध खाड़ी देशों में चल रही लड़ाई से है। नेपाल के लिए ईंधन की किल्लत एक बहुत बड़ी समस्या है। विदेशी मुद्रा का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों में काम करने वाले नेपाली नागरिकों की कमाई से आता है। RSP सरकार को इस संवेदनशील मसले से बहुत सावधानी से निपटना होगा। एक और चुनौती भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखने की हमेशा रहती है। अच्छी बात यह है कि फिलहाल दोनों शक्तिशाली पड़ोसियों के बीच कोई तनाव नहीं है। ऐसे में, बालेन शाह जैसे नेता अच्छी सिग्नलिंग का काम कर सकते हैं।

आगे की समस्याएं काफी गहरी हैं और दुर्भाग्य से, पिछले 35 सालों की चुनावी संस्कृति में इन पर ठीक से ध्यान नहीं दिया गया है। नेपाल में एक व्यवस्थित नौकरशाही, कानून का राज सुनिश्चित करने वाली न्यायपालिका और उद्यम-व्यापार खड़ा करने के लिए एक न्यूनतम ढांचे की कमी है। इन समस्याओं का समाधान रातों-रात नहीं होगा, लेकिन बालेन शाह एक अच्छी शुरुआत कर सकते हैं।

फिलहाल नेपाल में रोजगार का भारी संकट है। राजशाही विरोधी आंदोलन में बड़े-बड़े नेता बनने वाले नेपाली राजनेता सबसे पहले अपनी कुर्सी और ओहदा बचाने की चिंता करते रहे हैं। इसके बाद उनका ध्यान राष्ट्रीय आय के तीन पुराने स्रोतों पर जाता रहा है, और उसमें भी वे अपना हिस्सा सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं। ये तीन स्रोत हैं:
1. विदेशी सहायता: इसमें पश्चिमी NGO, चीन और भारत से मिलने वाली राष्ट्रीय मदद, और वर्ल्ड बैंक-IMF जैसी संस्थाओं से लिया जाने वाला कर्ज शामिल है।
2. विदेशों में काम करने वाले नेपाली कामगारों का भेजा हुआ पैसा: यह नेपाल की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
3. पर्यटन से होने वाली आमदनी: यह भी एक प्रमुख आय का स्रोत रहा है।

इन वित्तीय स्रोतों के साथ एक बड़ी समस्या यह है कि इनसे संगठित रोजगार का सृजन नहीं होता। यानी, ये स्रोत लोगों को स्थायी और व्यवस्थित नौकरियां नहीं दे पाते।

जब तक नेपाल का समाज सूचनाओं से कटा हुआ था, तब तक उसमें प्रकृति से जूझने वाली एक आत्मनिर्भर पहाड़ी आत्मसंतुष्टि बनी हुई थी। लेकिन, आज का नेपाली युवा वह सब चाहता है जो दुनिया में कहीं भी उसके जैसे लोगों को मिल रहा है। RSP ने अपने चुनावी घोषणापत्र में अगले पांच वर्षों में नेपाल को 7% सालाना ग्रोथ रेट के साथ 100 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का वादा किया है। इस लक्ष्य के आसपास भी पहुंचने के लिए बहुत बड़ी पूंजी की आवश्यकता होगी। यह पूंजी नेपाल तभी आएगी जब उसे यहाँ अपने लिए विकास की कोई संभावना दिखेगी, और सबसे महत्वपूर्ण, जब उसे डूब जाने का कोई खतरा नजर नहीं आएगा। उम्मीद है कि बालेन शाह और रबि लमिछाने राजनीति में जो परिपक्वता दिखाएंगे, वैसी ही वे अधिक बुनियादी मामलों में भी दिखाएंगे।

नेपाल की जनता की उम्मीदें बहुत बढ़ गई हैं। वे अब सिर्फ जीवित रहने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य युवाओं की तरह बेहतर जीवन जीने की चाहत रखते हैं। यह बदलाव सूचना क्रांति और वैश्विक जुड़ाव का परिणाम है। RSP का यह वादा कि वे अगले पांच सालों में नेपाल को 100 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बना देंगे, एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारी निवेश की जरूरत होगी। नेपाल को निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाना होगा, जहाँ उन्हें सुरक्षा और विकास की उम्मीद हो। यह तभी संभव है जब देश में राजनीतिक स्थिरता बनी रहे और आर्थिक नीतियां स्पष्ट और पारदर्शी हों।

बालेन शाह और रबि लमिछाने जैसे नेताओं का उदय यह दर्शाता है कि नेपाली जनता अब पारंपरिक राजनीति से हटकर कुछ नया चाहती है। वे ऐसे नेताओं को पसंद करते हैं जो जमीनी हकीकत को समझते हैं और जिनके पास समस्याओं का व्यावहारिक समाधान है। बालेन शाह का काठमांडू के मेयर के रूप में काम करने का अनुभव और उनकी बेदाग छवि ने उन्हें जनता का विश्वास दिलाया है। इसी तरह, रबि लमिछाने ने अपनी लोकप्रियता और युवा मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ का इस्तेमाल करके RSP को एक मजबूत राजनीतिक शक्ति बनाया है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि ये दोनों नेता नेपाल की जटिल राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं। उन्हें न केवल जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा, बल्कि देश को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने के लिए ठोस कदम भी उठाने होंगे। नेपाल का भविष्य अब इन नए नेताओं के कंधों पर है, और दुनिया की नजरें उन पर टिकी हैं कि वे इस नई जिम्मेदारी को कैसे निभाते हैं।