Wholesale Inflation Rose In February Reaching A Concerning 213
चिंता बढ़ी
नवभारत टाइम्स•
फरवरी में थोक महंगाई दर बढ़कर 2.13 प्रतिशत हो गई है। यह जनवरी के 1.81 प्रतिशत से अधिक है। खाने की चीजों की महंगाई भी बढ़ी है। यह दर 2.19 प्रतिशत पर पहुंच गई है। खुदरा महंगाई दर फरवरी में 3.2 प्रतिशत रही। यह आंकड़े अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।
फरवरी में थोक महंगाई दर बढ़कर 2.13% हो गई, जो जनवरी के 1.81% से ज्यादा है। खाने-पीने की चीजों के दाम भी 2.19% बढ़े हैं। वहीं, खुदरा महंगाई दर फरवरी में 3.2% रही।
यह जानकारी हाल ही में जारी हुए आंकड़ों से सामने आई है। थोक महंगाई में बढ़ोतरी चिंता का विषय हो सकती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर उत्पादकों को प्रभावित करती है। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ना आम आदमी की जेब पर भारी पड़ता है।जनवरी में थोक महंगाई 1.81% थी, लेकिन फरवरी में यह बढ़कर 2.13% पर पहुंच गई। इसका मतलब है कि फैक्ट्रियों से निकलने वाले सामानों की कीमतें बढ़ी हैं। खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर 2.19% रही, जो कि एक महत्वपूर्ण आंकड़ा है।
खुदरा महंगाई दर, जिसे हम आम बोलचाल में 'रिटेल महंगाई' कहते हैं, फरवरी में 3.2% दर्ज की गई। यह महंगाई वह है जो हम दुकानों पर सामान खरीदते समय देखते हैं। यह दर थोक महंगाई से अलग होती है।
थोक महंगाई (WPI) का मतलब है कि फैक्ट्रियों और बड़े व्यापारियों के स्तर पर चीजों के दाम कितने बढ़े हैं। वहीं, रिटेल महंगाई (CPI) का मतलब है कि आम ग्राहक को दुकानों पर चीजें कितने महंगे या सस्ते में मिल रही हैं।
खाने की चीजों की महंगाई का बढ़ना लोगों के लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है, क्योंकि यह उनकी रोजमर्रा की जरूरतें हैं। अगर खाने-पीने की चीजें महंगी होंगी तो लोगों का बजट बिगड़ जाएगा।
यह आंकड़े बताते हैं कि अर्थव्यवस्था में कीमतों का दबाव बढ़ रहा है। सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) इन आंकड़ों पर नजर रखते हैं ताकि महंगाई को काबू में रखा जा सके।