संकट में शहर, 10 साल में 10 मीटर गिरा भूजल स्तर

नवभारत टाइम्स

गुड़गांव शहर गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। पिछले दस सालों में भूजल स्तर 10 मीटर नीचे चला गया है। कई इलाकों में यह 40 मीटर से भी अधिक गहरा हो गया है। 1970 के दशक में पानी 6-7 मीटर पर मिलता था। अब यह 40 मीटर के पार है।

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गुड़गांव, जिसे मिलेनियम सिटी भी कहते हैं, में हर साल गर्मियों में होने वाला पानी का संकट अब सिर्फ कमी नहीं रह गया है, बल्कि यह समस्या जमीन के बहुत नीचे तक पहुँच गई है। नए आँकड़े बताते हैं कि शहर का भूजल स्तर औसतन 35 से 37 मीटर नीचे चला गया है। वहीं, जिन इलाकों में बहुत ज्यादा लोग रहते हैं, वहाँ यह 40 मीटर से भी ज्यादा गहरा हो गया है। चिंता की बात यह है कि यह भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। पिछले कुछ सालों के आँकड़े देखें तो हर साल पानी का स्तर करीब एक मीटर नीचे जा रहा है। अगर हम 50 साल पीछे जाएँ, तो यह तस्वीर और भी डरावनी लगती है। 1970 के दशक में पानी सिर्फ 6 से 7 मीटर की गहराई पर मिल जाता था, लेकिन आज यह 40 मीटर से भी ऊपर पहुँच गया है। इसका मतलब है कि कुछ ही दशकों में पानी 5 से 6 गुना ज्यादा गहराई में चला गया है।

पर्यावरणविद वैशाली राणा के अनुसार, सेंट्रल ग्राउंड वॉटर अथॉरिटी (CGWA) ने गुड़गांव को 'ओवर एक्सप्लोइटेड' यानी अत्यधिक दोहन वाली श्रेणी में रखा है। इसका मतलब है कि शहर से जितना पानी जमीन से निकाला जा रहा है, उसकी भरपाई उससे बहुत कम हो रही है। ऐसी स्थिति तब होती है जब भूजल का इस्तेमाल 100 प्रतिशत से भी ज्यादा हो जाता है। उन्होंने बताया कि शहर में भूजल को फिर से भरने वाले प्राकृतिक स्रोत तेजी से खत्म हो रहे हैं। शहर में अवैध तरीके से लगातार बोरवेल से पानी निकाला जा रहा है। वहीं, बारिश का पानी जमीन में जाने के बजाय पक्के नालों से बहकर बड़ी नालियों में चला जाता है। तेजी से बढ़ता शहरीकरण, निर्माण कार्य और हरियाली की कमी इस पानी के संकट को और बढ़ा रही है। जल विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर यही हाल रहा, तो आने वाले सालों में गुड़गांव के कई हिस्सों में पीने के पानी का गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
यह स्थिति इसलिए गंभीर है क्योंकि हम जितना पानी जमीन से निकाल रहे हैं, उतना वापस जमीन में नहीं जा रहा है। सोचिए, 50 साल पहले जहाँ 6-7 मीटर खोदने पर पानी मिल जाता था, वहीं आज 40 मीटर से भी ज्यादा नीचे जाना पड़ रहा है। यह दिखाता है कि पानी का भंडार कितनी तेजी से खत्म हो रहा है। शहर में नए-नए कंस्ट्रक्शन हो रहे हैं और पेड़-पौधे कम हो रहे हैं, जिससे बारिश का पानी जमीन में रिस नहीं पा रहा है। यह पानी सीधे नालों में बह जाता है।

वैशाली राणा ने साफ तौर पर कहा है कि CGWA ने गुड़गांव को 'ओवर एक्सप्लोइटेड' श्रेणी में रखा है। इसका मतलब है कि हम जरूरत से ज्यादा पानी निकाल रहे हैं। जब भूजल का दोहन 100 प्रतिशत से ऊपर चला जाता है, तो यह स्थिति बनती है। यह एक खतरनाक संकेत है। अगर हमने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो भविष्य में पीने के पानी के लिए बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। यह सिर्फ गर्मियों की बात नहीं है, बल्कि यह एक स्थायी संकट बनता जा रहा है। हमें पानी बचाने के तरीके खोजने होंगे और भूजल को रिचार्ज करने के उपायों पर ध्यान देना होगा।