Invest In Mutual Funds Without An Agent Save Your Money With Direct Plans
बिना एजेंट निवेश
नवभारतटाइम्स.कॉम•
मान लीजिए आप और आपका दोस्त म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। दोनों एक ही कंपनी चुनते हैं, स्कीम भी एक है। फर्क सिर्फ इतना है कि आपने सीधे कंपनी से खरीदा है, जबकि आपके दोस्त ने किसी एजेंट के जरिए। कुछ साल बाद दोनों का रिटर्न एक नहीं होगा।
म्यूचुअल फंड में दो तरह के प्लान होते हैं। पहला डायरेक्ट प्लान और दूसरा रेगुलर प्लान । डायरेक्ट प्लान में निवेशक सीधे म्यूचुअल फंड कंपनी के जरिये निवेश करता है। रेगुलर प्लान में निवेश कराने के लिए एजेंट या डिस्ट्रिब्यूटर की मदद ली जाती है। इनका कमीशन सीधे निवेशक के खाते से नहीं काटा जाता। इसे फंड के खर्च में शामिल कर दिया जाता है। इसलिए अधिकतर निवेशकों को पता भी नहीं चलता कि वे कितना कमीशन दे रहे हैं। बहुत से लोगों को लगता है कि सिर्फ एक बार एजेंट को कमीशन दिया जाता होगा। लेकिन, सच्चाई यह है कि यह खर्च हर साल निवेश से जुड़ा रहता है। यही वजह है कि शुरुआत में छोटा दिखने वाला अंतर लंबे समय में बड़ी रकम बन जाता है।म्यूचुअल फंड कंपनी का प्रतिनिधि ही वित्तीय सलाह दे, तब इससे हितों का टकराव हो सकता है। अगर सलाह सिर्फ शुरुआत में दी गई थी, तो क्या उसका कमीशन निवेशक से बरसों तक वसूला जाना चाहिए? डिस्ट्रिब्यूटर यह तर्क देते हैं कि वे सिर्फ निवेश बेचते नहीं, बल्कि बाद में भी मदद करते हैं। इस स्थिति में हर तरह की सलाह की अलग फीस होनी चाहिए। अब मार्केट की निगरानी करने वाली संस्था SEBI ने फैसला किया है कि म्यूचुअल फंड कंपनियों की वेबसाइट और ऐप पर निवेश करते समय डायरेक्ट प्लान अपने आप चुना हुआ मिलेगा। अगर कोई व्यक्ति रेगुलर प्लान लेना चाहता है, तो उसे खुद वह विकल्प चुनना होगा।
पिछले कुछ वर्षों में डायरेक्ट प्लान में निवेश करने वालों की संख्या बढ़ी है। इसकी बड़ी वजह डिजिटल प्लैटफॉर्म और लोगों में बढ़ती वित्तीय समझ मानी जा रही है। खासकर युवा निवेशक डायरेक्ट प्लान को ज्यादा पसंद कर रहे हैं, क्योंकि वे मोबाइल ऐप और ऑनलाइन प्लैटफॉर्म के जरिए खुद निवेश करना आसान समझते हैं। डायरेक्ट प्लान फायदेमंद हो सकता है। अगर किसी को फंड चुनने में मदद चाहिए, तब रेगुलर प्लान उपयोगी है। इसके बावजूद रेगुलर प्लान का नाम बदलकर एजेंट प्लान कर देना चाहिए, ताकि लोगों को साफ पता चले कि बीच में कोई बिचौलिया है। अगर निवेशक को सलाह चाहिए तो वह डायरेक्ट प्लान में निवेश कर सकता है और स्वतंत्र सलाहकार को अलग से फीस दे सकता है।