अनुष्का शेट्टी की प्रेरणादायक कहानी: कैसे एक योग प्रशिक्षक ने साउथ सिनेमा में नाम कमाया

NewsPoint•
Navbharat Times
अनुष्का शेट्टी, दक्षिण सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री, ने कभी फिल्मों में कदम रखने का सपना नहीं देखा था। उनका जन्म 7 नवंबर, 1981 को कर्नाटक के मैंगलुरु में हुआ था। अनुष्का ने बेंगलुरु के माउंट कार्मेल कॉलेज से कम्प्यूटर एप्लीकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की। पहले वह योग विशेषज्ञ बनना चाहती थीं और योग गुरु भरत ठाकुर से योग सीखा। एक योग क्लास में साउथ फिल्म डायरेक्टर मेहर रमेश की नजर अनुष्का पर पड़ी। उन्होंने अनुष्का को हीरोइन बनने का प्रस्ताव दिया। बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड और अभिनय का अनुभव होने पर अनुष्का ने पहले इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। हालांकि, बाद में डायरेक्टर की समझाने पर उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा।

उनकी पहली फिल्म 'सुपर' थी, जो 2005 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में उन्होंने अभिनेता नागार्जुन के साथ काम किया। यह उल्लेखनीय है कि अनुष्का का असली नाम स्वीटी शेट्टी था। फिल्म की शूटिंग के दौरान, पुरी जगन्नाथ और प्रोड्यूसर नागार्जुन को लगा कि 'स्वीटी' नाम दर्शकों को पसंद नहीं आएगा, इसलिए अनुष्का का नाम बदलकर 'अनुष्का' रखा गया। इसके बाद, वह इसी नाम से जानी जाने लगीं।
पहली दो फिल्मों के बाद, अनुष्का ने एक्टिंग छोड़ने का मन बना लिया था। उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में कहा था कि "मैं एक्टिंग छोड़ना चाहती थी।" लेकिन 2006 में उनकी भाग्य की रेखा बदल गई जब उन्होंने एस. एस. राजामौली की फिल्म 'विक्रमार्कुडु' में काम किया। इस फिल्म ने उन्हें तेलुगू सिनेमा में पहचान दिलाई और इसके बाद उन्होंने 'डॉन', 'किंग', 'शौर्यम' और 'बिल्ला' जैसी बेहतरीन फिल्मों में काम किया।

अनुष्का के करियर की सबसे बड़ी सफलता 'बाहुबली' फिल्म श्रृंखला से मिली। 2015 में 'बाहुबली: द बिगनिंग' और 2017 में 'बाहुबली: द कंक्लूजन' ने उनकी किस्मत बदल दी। अनुष्का को इस फिल्म में देवसेना के रोल के लिए डायरेक्टर एस. एस. राजामौली ने खुद कॉल किया। उन्होंने इस ऑफर को ठुकराया नहीं और यह फिल्म उनके लिए करियर का मील का पत्थर साबित हुई।

अनुष्का शेट्टी की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष करते हैं। यह दिखाता है कि कैसे एक अनपेक्षित मौका जीवन की दिशा बदल सकता है। अभिनेत्री ने साबित कर दिया है कि अगर मन में ठान लिया जाए, तो कोई भी सपना साकार किया जा सकता है। उनकी यात्रा इस बात का प्रमाण है कि मेहनत और संजीदगी से किसी भी शिखर पर पहुंचा जा सकता है।

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