भारत ने एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2026 में जापान को 4 1 से हराकर जीती, हरमनप्रीत सिंह बने टॉप स्कोरर
भारत ने एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2026 में जापान को 4-1 से हराकर जीती, हरमनप्रीत सिंह बने टॉप स्कोरर
NewsPoint•
पंजाब ने एक नई सफलता की कहानी लिखी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के सपनों को साकार करते हुए, 'हीरो एशियन चैंपियंस ट्रॉफी पंजाब 2026' का शानदार समापन हुआ। इस टूर्नामेंट में भारत ने जापान को फाइनल में 4-1 से हराया, जिससे भारत ने यह खिताब अपने नाम किया। मोहाली के 'ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर हॉकी स्टेडियम' और जालंधर के 'ओलंपियन सुरजीत हॉकी स्टेडियम' ने खेल के इस आयोजन में अपनी छाप छोड़ी। भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया। उसने सभी 7 मैच जीते, जिसमें जालंधर में लीग चरण के 5 मैच और मोहाली में सेमीफाइनल और फाइनल शामिल हैं। इस जीत के बाद, भारत ने लगातार तीसरी बार ट्रॉफी अपने नाम की।
भारत की इस जीत का मतलब केवल एक खिताब नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि भारतीय हॉकी टीम एशिया में शीर्ष पर है। कप्तान हरमनप्रीत सिंह को 'बेस्ट प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' चुना गया और उन्होंने 10 गोल करके 'टॉप स्कोरर' का खिताब भी हासिल किया। उनके लिए यह एक खास दिन था, क्योंकि इसके साथ ही वे सीनियर इंटरनेशनल गोल की कुल संख्या 250 पर पहुंच गए। इसके अलावा, गोलकीपर कृष्ण बहादुर पाठक को 'टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर' घोषित किया गया। उन्होंने कई अहम मौकों पर बेहतरीन बचाव किया, खासकर मलेशिया और साउथ कोरिया के खिलाफ मैचों में।इस टूर्नामेंट की शुरुआत से लेकर अंत तक, पंजाब ने एक नया मानक स्थापित किया है। मोहाली के स्टेडियम ने अपने पहले अंतरराष्ट्रीय इवेंट में ही शानदार आयोजन किया। स्टेडियम में बैठी भीड़, शानदार माहौल और विश्वस्तरीय सुविधाओं ने सभी का दिल जीत लिया। जालंधर का 'ओलंपियन सुरजीत हॉकी स्टेडियम' भी थोड़ा पीछे नहीं रहा। वहां लीग चरण के मैच बेहद रोमांचक रहे। भारत ने बांग्लादेश के खिलाफ 13-0 की शानदार जीत दर्ज की और मलेशिया के खिलाफ 4-2 का भी एक दिलचस्प मुकाबला खेला। दर्शकों का उत्साह देखने लायक था।
पंजाब ने यह साबित कर दिया कि वह न केवल भारतीय हॉकी का गढ़ है, बल्कि वह दुनिया के बड़े आयोजनों की मेजबानी करने के लिए भी तैयार है। इस ट्रॉफी की मेज़बानी ने पंजाब के वर्ल्ड कप 2030 की दावेदारी को और मजबूत किया है। पंजाब के स्टेडियम अब विश्व हॉकी की बड़ी प्रतियोगिताओं का चेहरा बन गए हैं।
इस टूर्नामेंट का महत्व सिर्फ खेल तक सीमित नहीं है। यह एक संदेश है कि भारतीय टीम मजबूत है और वह 2028 लॉस एंजेल्स ओलंपिक के लिए तैयार है। हरमनप्रीत और कृष्ण बहादुर जैसे खिलाड़ियों ने साबित किया कि भारतीय हॉकी में प्रतिभा और सामर्थ्य की कोई कमी नहीं है।
इस जीत ने हॉकी के प्रति पंजाब के प्रेम को और बढ़ाया है। अब, उम्मीद की जा रही है कि पंजाब आगे भी ऐसे ही बड़े आयोजन करेगा और हॉकी के मैदान में अपने अद्वितीय योगदान को जारी रखेगा। पंजाब हरियाली और उत्थान का प्रतीक है, और अब यह हॉकी जगत में भी अपनी पहचान बना चुका है।
इस प्रकार, पंजाब ने अपने सांस्कृतिक धरोहर को खेल के माध्यम से आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। हम सभी को यह गर्व है कि भारतीय हॉकी ने एक बार फिर से विश्व मंच पर अपना नाम रोशन किया है।