कलकत्ता उच्च न्यायालय ने केएमसी चुनावों की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाई, परिसीमन प्रक्रिया को चुनौती
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने केएमसी चुनावों की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाई, परिसीमन प्रक्रिया को चुनौती
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कोलकाता, 6 नवंबर (आईएएनएस)। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के लिए चुनाव की तारीखों की घोषणा करने वाली पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी। यह निर्णय उस याचिका के संदर्भ में आया है जिसमें केएमसी में हाल ही में वार्डों के परिसीमन को चुनौती दी गई है। नए परिसीमन के तहत वार्डों की संख्या 144 से बढ़कर 209 हो गई है। जस्टिस हिरण्मय भट्टाचार्य की एकल-न्यायाधीश पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। खंडपीठ ने साफ कहा है कि जब तक यह मामला सुलझ नहीं जाता, तब तक चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की जाएगी।
कोलकाता नगर निगम के चुनावों की तैयारी प्रस्तावित रूप से दिसंबर के अंतिम सप्ताह में होनी थी, और परिणाम जनवरी के पहले सप्ताह में घोषित होने की उम्मीद थी। लेकिन अब यह अनिश्चित हो गया है। अब तक, केएमसी में वार्डों के परिसीमन की प्रक्रिया हो चुकी थी। हालाँकि, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने इस परिसीमन की प्रक्रिया को चुनौती दी। सीपीआई (एम) के नेता और पूर्व पार्षद दीपू दास ने याचिका में आरोप लगाया कि नए वार्ड परिसीमन पर कई गंभीर आपत्तियाँ उठी थीं। उन्होंने कहा, "नागरिकों की राय जानने के लिए 'मौके पर जाकर जांच' करने और सार्वजनिक सुनवाई कराने का प्रस्ताव भी दिया गया था, लेकिन इन आपत्तियों और प्रस्तावों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।"
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि परिसीमन प्रक्रिया में वार्डों की जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति का ठीक से आकलन नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम का उद्देश्य किसी विशेष पार्टी को लाभ पहुंचाना था।
इस मामले की पहली सुनवाई जस्टिस हिरण्मय भट्टाचार्य की एकल-न्यायाधीश पीठ में हुई। लेकिन कोई विशेष आदेश दिए बिना, जस्टिस भट्टाचार्य ने सभी पक्षों को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके बाद, याचिकाकर्ता ने एकल-न्यायाधीश पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए जस्टिस भट्टाचार्य और जस्टिस अर्जुन रॉय की खंडपीठ का रुख किया।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि अगर चुनाव आयोग पहले ही चुनाव की तारीखों का ऐलान कर देता है, तो उनकी याचिका का कोई महत्त्व नहीं रह जाएगा।
खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए अंतरिम रोक लगा दी है। इससे केएमसी चुनाव कब होंगे, यह अब कन्फ्यूजिंग स्थिति में आ गया है।
कोलकाता नगर निगम में चल रही यह गहमागहमी चुनावों के नजदीक आने के साथ ही पार्टी के भीतर की खींचतान भी दर्शाती है। चुनाव आयोग के लिए यह एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है कि वह कब और कैसे चुनाव कराएगा।
यदि इस विवाद का जल्दी समाधान नहीं हुआ, तो इससे चुनावों की तारीखों पर असर पड़ेगा। इसलिए, सभी पक्षों को अभी की स्थिति का ध्यान रखते हुए उचित हल निकालने की जरूरत है।
अंततः, यह मामला चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की आवश्यकता को रेखांकित करता है। अगर यह विवाद खत्म होता है, तो वे चुनाव सही समय पर हो पाएंगे। ऐसा होने पर ही नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी। --आईएएनएस डीकेएम/एबीएम