केशव प्रसाद मौर्य ने धनतेरस पर शुभकामनाएं दीं और अखिलेश यादव पर साधा हमला

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Navbharat Times
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 6 नवंबर को धनतेरस, दीपावली, भैया दूज और छठ पूजा के अवसर पर प्रदेश और देशवासियों को शुभकामनाएं दी। इस मौके पर उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव को बागेश्वर बाबा पर टिप्पणी करने का कोई हक नहीं है और उनसे माफी मांगने की मांग की।

केशव प्रसाद मौर्य ने सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि दीपावली का पंचपर्व सभी के जीवन में खुशियाँ, सुख और समृद्धि लेकर आए। मौर्य ने अयोध्या धाम में दीपोत्सव कार्यक्रम और प्रयागराज में महर्षि भारद्वाज आश्रम में शुरू होने वाले दीप पर्व का विशेष उल्लेख किया, जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "महर्षि भारद्वाज आश्रम का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। भगवान श्रीराम वहां पहुंचकर महर्षि भारद्वाज से आशीर्वाद लेने गए थे।"
उपमुख्यमंत्री ने लोगों से कामना की कि अगले दीपावली तक हर परिवार का जीवन खुशियों से भर जाए। मौर्य ने कहा कि दीपावली पर अंधकार दूर होकर प्रकाश फैलता है, उसी तरह लोगों के जीवन से भी दुख और परेशानियों का अंत हो।

जैसे ही उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उर्फ बागेश्वर बाबा और अखिलेश यादव के बीच हुई बयानबाजी पर प्रतिक्रिया दी, मौर्य ने सीधे अखिलेश यादव को घेर लिया। उन्होंने पूछा, "अखिलेश यादव को भारतीय संस्कृति और सनातन संस्कृति की चिंता कब से होने लगी?" मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव खुद को यदुवंशी कहने का हक तो चाहते हैं, लेकिन जब श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर मंदिर बनाने का विषय आता है, तब उनके मुंह पर ताला लग जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि बागेश्वर धाम सरकार की बात करते हुए कहा कि धीरेंद्र शास्त्री के प्रति देश ही नहीं, बल्कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धा का भाव है। मौर्य ने कहा, "लोग उन्हें सुनने और उनका आशीर्वाद लेने आते हैं। ऐसे संत पर राजनीतिक टिप्पणी करना उचित नहीं है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि संतों और धार्मिक व्यक्तित्वों पर टिप्पणी करने का अधिकार केवल पूज्य संतों और आचार्यों को है। मौर्य ने कहा, "अखिलेश यादव के द्वारा बागेश्वर बाबा के बारे में टिप्पणी गलत है।"

इससे पहले, मौर्य ने भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न स्वरूपों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "भक्त अपनी श्रद्धा और भक्ति के अनुसार उन्हें बाल गोपाल, नटखट, माखन चोर, भगवान श्रीकृष्ण और द्वारिकाधीश जैसे नामों से पुकारते हैं।" मौर्य ने कहा कि वह स्वयं भी धार्मिक विषयों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं रखते। उनका मानना है कि जब कोई संत कोई मुद्दा उठाता है, तो उस पर प्रतिक्रिया भी संत समाज की ओर से ही आनी चाहिए। साधु-संतों के विचार धार्मिक क्षेत्र का विषय हैं, राजनीतिक क्षेत्र का नहीं। अत: राजनीतिक नेताओं को ऐसे मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए।

इस स्थिति में, मौर्य ने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा, "यदि उन्हें वास्तव में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े किसी विषय की चिंता है, तो वह उनके साथ भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण से जुड़े आंदोलन में शामिल हों।" इसके साथ ही उन्होंने सपा प्रमुख पर मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति और तुष्टिकरण का आरोप लगाया। मौर्य ने कहा, "अखिलेश यादव मुस्लिम वोट बैंक की चिंता के कारण कृष्ण भक्तों, शिव भक्तों और राम भक्तों का साथ नहीं दे सकते।" उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अखिलेश की राजनीति में धार्मिक आस्था से ज्यादा वोट बैंक का महत्व है।

इस बयानबाजी के पीछे मौर्य का जोरदार टकराव राजनीतिक धरातल पर देखने को मिला। उत्तर प्रदेश में सपा और भाजपा के बीच चल रही आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति ने एक बार फिर धार्मिक मुद्दों को भी गरमा दिया है। इस वार्तालाप में साफ दिखता है कि प्रदेश में धर्म और राजनीति का कैसा संबंध है। मौर्य के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि वे राजनीतिक रूप से कैसे अपने विपक्षी दलों पर हमला करने के लिए धार्मिक मुद्दों का सहारा लेते हैं।

इस तरह, उपमुख्यमंत्री का यह बयान एक ओर जहां दीपावली के शुभ अवसर पर बधाई थी, वहीं दूसरी ओर उन्होंने अपनी राजनीतिक मंशा भी स्पष्ट कर दी। मौर्य का बयान और उसकी प्रतिक्रिया दर्शाते हैं कि उत्तर प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी केवल चुनावी लाभ के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक पहलों से भी जुड़ी है।

इस सारांश में सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं का समावेश किया गया है। मौर्य ने रोजगार, संस्कृति और धार्मिक आस्था के मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान दिया है। उनकी चुनौती का क्या असर राजनीति पर पड़ेगा, यह तो भविष्य में ही स्पष्ट होगा, लेकिन इस समय वे अपनी स्थिति को मजबूत करने में लगे हैं।

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