Supreme Court Compulsory Retirement Not Punishment Nor Stain On Character Decision Can Be Taken In Public Interest
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कंपलसरी रिटायरमेंट न सज़ा, न चरित्र पर दाग
नवभारतटाइम्स.कॉम•
n NBT रिपोर्ट, नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी सरकारी कर्मचारी को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त करने यानी Compulsory Retirement का आदेश न तो दंडात्मक होता है और न ही उसके चरित्र पर कोई दाग लगाता है। इसका यह मतलब भी नहीं है कि कर्मचारी को कदाचार का दोषी पाया गया है। सक्षम प्राधिकारी जनहित में यह तय कर सकता है कि किसी कर्मचारी को सेवा में बनाए रखना प्रशासनिक हित में उचित है या नहीं।जस्टिस मनमोहन और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने 2017 में छत्तीसगढ़ सरकार के 5 कर्मचारियों को कंपलसरी रिटायरमेंट देने के फैसले को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की। कर्मचारियों की दलील थी कि समान सेवा रेकॉर्ड वाले दूसरे कर्मचारियों को रिटायरमेंट नहीं दी गई। यह भेदभाव है। कोर्ट ने इस दलील को खारिज किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार सिर्फ अनुमान या मनमर्जी से अनिवार्य सेवानिवृत्त नहीं दे सकती। वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट, काम की परफॉर्मेंस और अन्य सेवा रेकॉर्ड जैसे प्रासंगिक दस्तावेजों का आधार जरूरी है।