छोटी दिवाली 2023: जानें नरक चतुर्दशी की कहानी और विशेष धार्मिक कार्य

NewsPoint•
2023
दिवाली का पांच दिन का पर्व धनतेरस से शुरू हो गया है। इस साल दीपावली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। इससे एक दिन पहले छोटी दिवाली मनाई जाती है, जिसे नरक चतुर्दशी और रूप चौदस भी कहते हैं। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, छोटी दिवाली भगवान श्रीकृष्ण और राक्षस नरकासुर से जुड़ी हुई है। यह माना जाता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया और उसके बंदीगृह में कैद हजारों महिलाओं को मुक्त कराया। इस उत्सव की खुशी में लोगों ने दीप जलाए थे। इसी परंपरा के चलते नरक चतुर्दशी पर दीपदान और स्नान का महत्व है।

इस पर्व की पौराणिक कथा एक शक्तिशाली राक्षस भौमासुर से शुरू होती है, जिसे नरकासुर कहा जाता है। नरकासुर ने अपने घमंड में देवताओं और आम जनता पर अत्याचार करना शुरू कर दिया था। उसने देवताओं की कई बहुमूल्य वस्तुओं को छीन लिया और हजारों कन्याओं का अपहरण कर उन्हें बंदी बना लिया था। इससे परेशान होकर देवराज इंद्र भगवान श्रीकृष्ण के पास पहुँचे। उन्होंने भगवान कृष्ण से नरकासुर के आतंक से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। भगवान कृष्ण ने तुरंत इस काम के लिए कदम उठाया।
भगवान कृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ गरुड़ पर सवार होकर नरकासुर के नगर प्रागज्योतिषपुर पहुंचे। वहां पहुँचकर पहले उन्होंने मुर नामक राक्षस और उसके छह पुत्रों का वध किया। जब नरकासुर को इसकी जानकारी मिली, तो वह अपनी विशाल सेना के साथ युद्ध करने आ गया। नरकासुर को यह वरदान मिला था कि उसकी मृत्यु एक स्त्री के हाथों होगी। इस दौरान भगवान कृष्ण ने सत्यभामा को अपने रथ का सारथी बनाया। अंततः सत्यभामा की सहायता से नरकासुर का वध कर दिया गया। साथ ही, भगवान कृष्ण ने नरकासुर के पुत्र भगदत्त को अभयदान देकर प्रागज्योतिषपुर का राजा बना दिया।

यह प्रमुख बात है कि नरकासुर का वध कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को हुआ था। इसीलिए इस दिन को नरक चतुर्दशी के नाम से पुकारा जाता है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने नरकासुर की कैद से लगभग 16,000 महिलाओं को भी मुक्त कराया था। इस खुशी में लोगों ने दीप जलाए और दीपदान किया। यही परंपरा बाद में छोटी दिवाली का हिस्सा बन गई।

छोटी दिवाली पर विशेष तेल और उबटन से स्नान करने की परंपरा है। नरक चतुर्दशी पर सुबह सूर्योदय से पहले तेल लगाकर स्नान करने का महत्व है। इसे अभ्यंग स्नान या नरक स्नान कहा जाता है। कथा के अनुसार, नरकासुर के वध के बाद भगवान कृष्ण ने अपने शरीर पर लगे रक्त के निशान और गंदगी साफ करने के लिए तेल से स्नान किया था। उसी मान्यता के चलते लोग इस दिन तेल और उबटन लगाकर स्नान करते हैं। इसे शुभता, सुंदरता और शुद्धता से जोड़ा गया है। यह माना जाता है कि इस दिन विधि-विधान से स्नान करने से नरक के भय से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

छोटी दिवाली पर करने योग्य कुछ खास कार्य हैं:
1. सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करें। यह दिन का शुभ समय माना जाता है।
2. घर की साफ-सफाई करें ताकि सकारात्मकता का संचार हो सके। खासकर घर के मुख्य दरवाजे और पूजा स्थल की सफाई करें।
3. शाम को दीपक जलाएं। इस दिन घर के मुख्य दरवाजे, आंगन और पूजा स्थल पर दीपक जलाने की परंपरा है। कई जगह यमराज के नाम से भी दीपक जलाने की प्रथा है, जिसे यम दीपदान कहा जाता है।
4. भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें। यह दिन भगवान कृष्ण से जुड़ा है, इसलिए श्रद्धा के साथ उनकी पूजा करें और अपने परिवार की सुख-शांति की कामना करें।
5. घर को सजाने के लिए रंगोली बनाएं और फूलों का उपयोग करें। यह शुभ माना जाता है।
6. परिवार के साथ समय बिताएं, मिठाइयाँ बांटें और जरूरतमंदों की मदद करें। छोटी दिवाली का पर्व खुशियों को बांटने और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है।

इस तरह, छोटी दिवाली केवल दीप जलाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत, अन्याय से मुक्ति और नए सकारात्मकता लाने का प्रतीक भी है। इस दिन लोग एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटने और दूसरों की मदद करने के लिए आगे बढ़ते हैं। यही इस पर्व की असली भावना है।

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