मौलाना साजिद रशीदी ने अखिलेश यादव पर साधा निशाना, कहा: 'वे नकली हिंदू हैं'

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Navbharat Times
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के अयोध्या में राम मंदिर जाने के प्रस्तावित दौरे पर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के प्रमुख मौलाना साजिद रशीदी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, इसलिए अखिलेश यादव को राम याद आ रहे हैं, और वे असल में नकली हिंदू हैं। मौलाना ने स्पष्ट किया कि अखिलेश यादव के हालिया बयानों और मीडिया में चल रही खबरों के बारे में उनका यह कहना है। उन्होंने यह भी कहा कि इतने सालों तक यादव राम मंदिर नहीं गए, लेकिन अब चुनावी मौसम में यह दौरा किया जा रहा है।

मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि एक तरफ अखिलेश यादव दावा करते हैं कि वे किसी देवी-देवता को नहीं मानते, दूसरी ओर उनके पार्टी का नया नारा है, "हम भगवान कृष्ण को लाएंगे।" मौलाना ने सवाल उठाया कि जब आप भगवान कृष्ण को लाने का वादा कर रहे हैं, तो राम मंदिर जाने का क्या मतलब है? यह सब एक दिखावा है। मौलाना ने कहा कि "ये सब नकली हिंदू हैं, बस दिखावे के लिए हिंदू हैं। असल में, अखिलेश यादव नास्तिक हैं; वे किसी भी देवी-देवता को नहीं मानते।"
मौलाना ने मुलायम सिंह यादव के एक बयान को भी याद दिलाया, जिसमें कहा गया था, "जो पिता का नहीं हुआ, वह किसी का नहीं हो सकता।" उन्होंने भाजपा प्रमुख नितिन नवीन के बयान पर कहा कि अखिलेश यादव अवसरवादी नेता हैं और समाजवादी पार्टी जानबूझकर अपने फायदे के लिए अलग-अलग बयान देती है। मौलाना ने कहा कि " लाल टोपी भी पहन लेते हैं, यह सब अवसरवाद है।" चुनाव की नजदीकियों को देखते हुए वे सभी काम करेंगे।

उन्होंने कहे कि आजम खान से जुड़े मुद्दों पर भी सपा के लोग उनकी गृहमंत्री बनाने की बातें कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि मुसलमान अब समझ गए हैं और अखिलेश यादव का अवसरवाद 2027 के विधानसभा चुनाव में उन्हें डूबो देगा।

बाबरी मस्जिद को गिराने के दृश्य देखकर रोने के बारे में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की टिप्पणी पर मौलाना ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि "यह मगरमच्छ के आंसू हैं" क्योंकि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब कोई प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि "अगर वे चाहते तो इसे बचा सकते थे।" 2014 तक कांग्रेस सरकार सत्ता में रहने के बावजूद, उन्होंने न तो इसे बचाने की कोशिश की और न ही इसे फिर से बनाने का कोई प्रयास किया।

मौलाना ने इस बारे में कहा कि जब उनकी सरकार थी और बाबरी मस्जिद गिराई गई थी, तो उन्हें सिर्फ आंसू नहीं बहाने चाहिए थे। उन्हें इसके पुनर्निर्माण के लिए भी कदम उठाने चाहिए थे। "अगर कांग्रेस अपने गुनाहों का प्रायश्चित करना चाहती है और मुसलमानों को फिर से अपने साथ लाना चाहती है, तो उनके पास अब एक मौका है," उन्होंने कहा।

मौलाना ने आगे कहा कि कांग्रेस को बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण का वादा करना चाहिए, और यदि सत्ता में आए तो इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा देना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह संवैधानिक हो सकता था। "जब 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साजिश में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए," तब पिछली कांग्रेस सरकार में उनकी स्थिति इसे संवैधानिक तरीके से करवा सकती थी।

मौलाना ने कहा कि "यह आपके लिए एक सुनहरा मौका था।" अब ऐसा लगता है जैसे "साँप के निकल जाने के बाद जमीन पीटने का कोई फायदा नहीं।" उन्होंने कहा कि अब ऐसे बयानों से वे जानबूझकर उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोटों का फायदा उठाना चाहते हैं। लेकिन मुसलमानों के लिए यह एक गहरा जख्म था जिसे वे कभी नहीं भूल पाएंगे।

इस प्रकार, मौलाना साजिद रशीदी ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि मुसलमान अब समझ चुके हैं और किसी भी अवसरवादिता के खिलाफ खड़े रहेंगे। उनका मानना है कि 2027 का चुनाव ऐसे नेताओं के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।

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