राजकोट हवाई अड्डे पर सीआईएसएफ ने की एंटी-हाईजैकिंग मॉक एक्सरसाइज, सुरक्षा तैयारी का किया परीक्षण

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Navbharat Times
राजकोट, 8 जुलाई: राजकोट हवाई अड्डे की सुरक्षा को और भी पुख्ता बनाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने एक महत्वपूर्ण वार्षिक एंटी-हाईजैकिंग मॉक एक्सरसाइज (एएचएमई) का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य विमान अपहरण जैसी गंभीर आपातकालीन स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी, उनकी तुरंत कार्रवाई करने की क्षमता और उनके बीच आपसी तालमेल का परीक्षण करना था। इस मॉक ड्रिल की अध्यक्षता राजकोट के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (आईपीएस) चैतन्य मंडलिक ने की। इस अभ्यास में सीआईएसएफ, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), जिला प्रशासन, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), एयरलाइंस, विमानन क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण लोग और अन्य संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी और जवान शामिल हुए।

अभ्यास के दौरान, विमान अपहरण जैसी काल्पनिक लेकिन बिल्कुल वास्तविक लगने वाली परिस्थितियों का मंचन किया गया। इसका मकसद यह परखना था कि ऐसी गंभीर स्थिति में सभी सुरक्षा एजेंसियां कितनी फुर्ती और प्रभावी ढंग से काम कर सकती हैं। इस दौरान, सुरक्षा व्यवस्था, संचार के तरीके और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल को भी बारीकी से जांचा गया। इस तरह के अभ्यास सुरक्षा एजेंसियों की ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करने में बहुत मददगार होते हैं। ये विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने और विमानन सुरक्षा से जुड़ी बदलती चुनौतियों का सामना करने की क्षमता को बढ़ाते हैं।
दरअसल, एंटी-हाईजैकिंग मॉक एक्सरसाइज देश भर के हवाई अड्डों पर नियमित रूप से होने वाली एक अनिवार्य और पूरी तरह से सुरक्षा से जुड़ी कवायद है। इसका उद्देश्य विमान अपहरण जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए बनाई गई आपदा और सुरक्षा योजनाओं की प्रभावशीलता को जांचना होता है। इन जटिल अभ्यासों के माध्यम से यह देखा जाता है कि सीआईएसएफ, स्थानीय पुलिस और जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) जैसे विशेष बल किसी भी खतरे को कितनी जल्दी नियंत्रित कर सकते हैं। इसके साथ ही, एयरपोर्ट प्रबंधन, एयरलाइंस और सरकारी खुफिया एजेंसियों के बीच संचार और समन्वय की भी समीक्षा की जाती है।

इस मॉक ड्रिल का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसके जरिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) में किसी भी तरह की कमी या खामियों का पता लगाया जाता है। इन कमियों को समय रहते दूर किया जाता है, ताकि भविष्य में विमानन सुरक्षा से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके। यह अभ्यास सुनिश्चित करता है कि सभी एजेंसियां एक साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं और किसी भी अप्रत्याशित घटना से निपटने में सक्षम हैं। यह अभ्यास न केवल सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि विभिन्न एजेंसियों के बीच विश्वास और सहयोग को भी बढ़ाता है।

इस तरह के अभ्यास यह सुनिश्चित करते हैं कि हवाई अड्डे पर मौजूद हर व्यक्ति, चाहे वह यात्री हो या कर्मचारी, सुरक्षित रहे। यह अभ्यास एक तरह से सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक 'रिहर्सल' की तरह होता है, जिससे वे वास्तविक आपात स्थिति में बिना किसी घबराहट के अपना काम कर सकें। यह सुनिश्चित करता है कि सुरक्षा के सभी पहलू, जैसे कि घुसपैठ रोकना, बंधकों को छुड़ाना और संदिग्धों को पकड़ना, सुचारू रूप से किए जा सकें। यह अभ्यास राजकोट हवाई अड्डे को और भी सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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