पलामू में NH-39 निर्माण पर ग्रामीणों और पुलिस में भिड़ंत, कई घायल

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पलामू, 9 जुलाई। पलामू जिले के चियांकी में नेशनल हाईवे-39 के निर्माण को लेकर गुरुवार सुबह प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों के बीच हिंसक झड़प हो गई। ग्रामीणों ने मुआवजे के बिना मकान तोड़े जाने का विरोध करते हुए पत्थरबाजी की, जिसके जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस टकराव में कई ग्रामीण और दो पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिन्हें मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमएमसीएच) में भर्ती कराया गया है।

यह घटना सदर थाना क्षेत्र के चियांकी में वन विभाग के चेकनाका के पास हुई। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की टीम सड़क निर्माण के लिए अतिक्रमण हटाने आई थी। जब जेसीबी मशीन से मकान तोड़ने की कोशिश हुई तो स्थानीय लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया गया है। इसी बात को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो जल्द ही पत्थरबाजी और लाठीचार्ज में बदल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ग्रामीणों ने पहले पत्थर फेंकना शुरू किया। इसके बाद पुलिस ने हालात को काबू में करने के लिए लाठीचार्ज का सहारा लिया। इस झड़प में झारखंड सशस्त्र पुलिस (जैप) के जवान राजमोहन सिंह के सिर में गंभीर चोट आई है। वहीं, सहायक महिला पुलिसकर्मी प्रिया कुमारी के पैर में भी चोट लगी है। अन्य घायल पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों का भी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

प्रशासन ने हाईवे निर्माण के काम को लेकर पहले ही उस इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर रखी थी। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां जमा हो गए और अपना विरोध जताया। घटना की खबर मिलते ही अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय पांडे, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राजेश यादव और सदर थाना प्रभारी अफजल अंसारी सहित कई बड़े अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद रहे और स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखी।

इस झड़प के कारण कुछ देर के लिए सड़क पर यातायात भी रुक गया था, जिसे बाद में पुलिस ने खुलवा दिया। पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। यह घटना राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं और स्थानीय लोगों के विरोध को उजागर करती है। ग्रामीणों की मुख्य मांग उचित मुआवजा है, जिसके बिना वे अपने घरों को तोड़े जाने का विरोध कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि वे नियमों के अनुसार कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।

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