प्रियंका चतुर्वेदी का केंद्र सरकार पर हमला: पेपर लीक, राम मंदिर चंदा और मानसून सत्र पर उठाए सवाल
प्रियंका चतुर्वेदी का केंद्र सरकार पर हमला: पेपर लीक, राम मंदिर चंदा और मानसून सत्र पर उठाए सवाल
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मुंबई, 21 जुलाई (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर पेपर लीक, सीजेपी के आंदोलन, संसद के मानसून सत्र में बाधा, प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्ष के प्रदर्शन और राम मंदिर चंदा मामले में पारदर्शिता की कमी को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाबदेही तय करने से बच रही है और युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि मौजूदा एसआईटी की जांच पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिससे नई एसआईटी के गठन की बात सामने आ रही है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि मामले की जांच सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में क्यों नहीं कराई जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि निष्पक्ष जांच इसलिए नहीं हो रही क्योंकि भाजपा ने राम मंदिर को आस्था से अधिक चुनावी अवसर के रूप में इस्तेमाल किया।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि राम मंदिर का भव्य निर्माण तो हो गया, लेकिन उससे जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जा रही है। जिन लोगों पर अनियमितताओं के आरोप हैं, उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिलने की आशंका के कारण निष्पक्ष जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अचानक नहीं हुआ है। पिछले कई दिनों से प्रदर्शन चल रहे हैं और उससे पहले भी विपक्ष लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करता रहा है। कांग्रेस, उसका युवा संगठन एनएसयूआई और अन्य छात्र संगठन लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। राहुल गांधी भी काफी समय से छात्रों की आवाज को बुलंद कर रहे हैं। अलग-अलग संगठनों के मंच भले अलग हों, लेकिन सभी की मूल मांग एक ही है: शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय हो और युवाओं को यह भरोसा दिया जाए कि उनके भविष्य की सुरक्षा और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सरकार निभाएगी।संसद के मानसून सत्र को लेकर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह सत्र सुचारु रूप से चल सकता था, लेकिन सरकार स्वयं इसे चलने नहीं देना चाहती। नीट पेपर लीक और पुनर्परीक्षा के मुद्दे के बाद महाराष्ट्र में भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के पेपर लीक का मामला सामने आया है, जिसकी कड़ियां उसी कथित पेपर लीक नेटवर्क से जुड़ने की बात कही जा रही है। यदि सरकार समय रहते जवाबदेही तय करती और शिक्षा मंत्री से इस्तीफा लेती तो हालात इतने नहीं बिगड़ते। सरकार ने संवाद स्थापित करने के बजाय अहंकार का रास्ता अपनाया है। इसी वजह से आज संसद का मानसून सत्र बाधित हो रहा है और विपक्ष को सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन पर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक असाधारण स्थिति है, जब दो मौजूदा मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सांसद प्रधानमंत्री के आवास के बाहर धरना देने को मजबूर हुए हैं। ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि सरकार तक छात्रों की आवाज नहीं पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और पूरे मामले में जवाबदेही तय करना है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसकी कई वीडियो सामने आई हैं। इसी के विरोध में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्षी नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दे रहे हैं ताकि सरकार छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुने।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि पेपर लीक का मामला सामने आए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक ऐसी ठोस कार्रवाई नहीं की है जिससे छात्रों का विश्वास बहाल हो सके। हजारों छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कई छात्रों ने पुनर्परीक्षा नहीं दी, कुछ ने पढ़ाई छोड़ दी और कुछ छात्रों ने आत्महत्या भी की है। कई अभिभावक भी जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं और सरकार से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। आज जिस बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक आंदोलन कर रहे हैं, वह इस बात का संकेत है कि उन्हें लग रहा है कि केंद्र सरकार उनकी आवाज सुनने के बजाय उसे लगातार अनदेखा कर रही है।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर चंदा मामले में सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी ने एसआईटी की जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब जांच पर ही प्रश्नचिह्न लग रहे हैं, तो नई एसआईटी गठित करने की बात सामने आ रही है। यह स्थिति चिंताजनक है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि मामले की जांच सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में क्यों नहीं कराई जा रही है? प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि निष्पक्ष जांच इसलिए नहीं हो रही है क्योंकि भाजपा ने राम मंदिर को आस्था से अधिक एक चुनावी अवसर के रूप में इस्तेमाल किया है। भव्य मंदिर का निर्माण तो हो गया, लेकिन उससे जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जा रही है। जिन लोगों पर अनियमितताओं के आरोप हैं, उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिलने की आशंका के कारण निष्पक्ष जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। यह स्थिति जनता के विश्वास को ठेस पहुंचाती है।
सीजेपी के आंदोलन को लेकर उन्होंने कहा कि यह कोई अचानक हुआ प्रदर्शन नहीं है। पिछले कई दिनों से प्रदर्शन चल रहे हैं और इससे पहले भी विपक्ष लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करता रहा है। कांग्रेस, उसका युवा संगठन एनएसयूआई और अन्य छात्र संगठन लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। राहुल गांधी भी काफी समय से छात्रों की आवाज को बुलंद कर रहे हैं। भले ही अलग-अलग संगठनों के मंच अलग हों, लेकिन सभी की मूल मांग एक ही है। वे चाहते हैं कि शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय हो और युवाओं को यह भरोसा दिया जाए कि उनके भविष्य की सुरक्षा और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सरकार निभाएगी। यह युवाओं के भविष्य का सवाल है और सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
संसद के मानसून सत्र के बाधित होने पर उन्होंने कहा कि यह सत्र सुचारु रूप से चल सकता था, लेकिन सरकार स्वयं इसे चलने नहीं देना चाहती। नीट पेपर लीक और पुनर्परीक्षा के मुद्दे के बाद महाराष्ट्र में भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के पेपर लीक का मामला सामने आया है। इसकी कड़ियां उसी कथित पेपर लीक नेटवर्क से जुड़ने की बात कही जा रही है। यदि सरकार समय रहते जवाबदेही तय करती और शिक्षा मंत्री से इस्तीफा लेती तो हालात इतने नहीं बिगड़ते। सरकार ने संवाद स्थापित करने के बजाय अहंकार का रास्ता अपनाया है। इसी वजह से आज संसद का मानसून सत्र बाधित हो रहा है और विपक्ष को सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ रहा है। यह सरकार की विफलता को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक असाधारण स्थिति है। जब दो मौजूदा मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सांसद प्रधानमंत्री के आवास के बाहर धरना देने को मजबूर हुए हैं, तो यह दर्शाता है कि स्थिति कितनी गंभीर है। ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि सरकार तक छात्रों की आवाज नहीं पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और पूरे मामले में जवाबदेही तय करना है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसकी कई वीडियो सामने आई हैं। इसी के विरोध में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्षी नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दे रहे हैं ताकि सरकार छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुने। यह सरकार पर दबाव बनाने का एक तरीका है ताकि वह अपनी जिम्मेदारियों से मुंह न मोड़ सके।
प्रियंका चतुर्वेदी ने जोर देकर कहा कि पेपर लीक का मामला सामने आए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक ऐसी ठोस कार्रवाई नहीं की है जिससे छात्रों का विश्वास बहाल हो सके। हजारों छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कई छात्रों ने पुनर्परीक्षा नहीं दी, कुछ ने पढ़ाई छोड़ दी और कुछ छात्रों ने आत्महत्या भी की है। यह बहुत ही दुखद और चिंताजनक स्थिति है। कई अभिभावक भी जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं और सरकार से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। आज जिस बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक आंदोलन कर रहे हैं, वह इस बात का संकेत है कि उन्हें लग रहा है कि केंद्र सरकार उनकी आवाज सुनने के बजाय उसे लगातार अनदेखा कर रही है। सरकार को इन युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए और उनकी मांगों पर ध्यान देना चाहिए।