दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई की झड़पों में हत्या के प्रयास समेत गंभीर धाराएं जोड़ीं, 129 पुलिसकर्मी घायल

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दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को हुई झड़पों के मामले में दर्ज FIR में हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं जोड़ दी हैं। पुलिस का कहना है कि कुछ लोगों ने भीड़ को उकसाकर बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर भेजने की कोशिश की थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला किया, जिसमें कई जवान घायल हो गए। यह FIR कर्तव्य पथ थाने में तैनात एक इंस्पेक्टर की शिकायत पर दर्ज हुई है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह घटना रेल भवन और संसद के बहुत करीब हुई थी। FIR में बताया गया है कि इंस्पेक्टर की ड्यूटी सुबह 5 बजे से पिंक बूथ पर लगी थी। वायरलेस पर सूचना मिलते ही पुलिस टीम रेल भवन राउंडअबाउट के बैरिकेड्स पर पहुंची, जहां पहले से ही हजारों प्रदर्शनकारी मौजूद थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बताया कि उस इलाके में धारा 163 लागू है और वहां प्रदर्शन की इजाजत नहीं है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे और नारेबाजी करते रहे।
FIR में साफ तौर पर कहा गया है, “कुछ लोगों ने भीड़ को बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने के लिए उकसाया था। इसी दौरान, प्रदर्शनकारियों ने Policeकर्मियों को घेरा, मारपीट की और चप्पल व पत्थर फेंके। वहीं, भीड़ ने Policeकर्मियों की हत्या की नीयत से हमला किया, जिससे कई जवान घायल हुए। संसद और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा के मद्देनजर Police ने हल्का लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े।”

इस घटना में 129 पुलिसकर्मी और 60 से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। इस पूरे मामले को लेकर दिल्ली पुलिस ने अब तक करीब 15 FIR दर्ज की हैं। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने जानबूझकर पुलिसकर्मियों पर हमला किया था, जिसका मकसद उनकी हत्या करना था।

वहीं, जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शनों से जुड़ी गलत जानकारियों को लेकर दिल्ली पुलिस शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी। सेंट्रल जिले के DCP रोहित राजबीर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर पुलिस का पक्ष रखेंगे। पुलिस का मानना है कि कुछ लोग जानबूझकर गलत खबरें फैलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

यह घटना इस बात को उजागर करती है कि कैसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी हिंसक रूप ले सकते हैं, खासकर जब कुछ लोग भीड़ को भड़काने का काम करते हैं। पुलिस का कहना है कि वे किसी भी सूरत में कानून को हाथ में लेने वालों को बख्शेंगे नहीं और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। संसद और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों की सुरक्षा सर्वोपरि है और पुलिस किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बार-बार चेतावनी दी थी कि वे कानून का पालन करें और शांति बनाए रखें। लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिस की चेतावनी को अनसुना कर दिया और हिंसक रवैया अपनाया। इस वजह से पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा, ताकि स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सके। पुलिस का यह भी कहना है कि वे प्रदर्शनकारियों की मांगों को सुनने के लिए तैयार थे, लेकिन जिस तरह से उन्होंने पुलिस पर हमला किया, वह पूरी तरह से गलत था।

इस मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस उन सभी लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है जिन्होंने भीड़ को उकसाया और पुलिस पर हमला किया। पुलिस का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और सभी नागरिक सुरक्षित रहें।

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