88 करोड़ की ठगी का आरोपी अविनाश राठौड़ UAE से प्रत्यर्पित, पुणे EOW ने किया गिरफ्तार

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पुणे, 25 जुलाई: पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने 88 करोड़ रुपये की कथित निवेश ठगी के मामले में मुख्य आरोपी अविनाश अर्जुन राठौड़ को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से प्रत्यर्पित कर गिरफ्तार कर लिया है। अविनाश राठौड़, जो एपीएस वेल्थ वेंचर्स एलएलपी का संचालक था, निवेशकों को अधिक मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने के आरोप में लंबे समय से फरार चल रहा था। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। भारत लाए जाने के बाद उसे मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर पुणे लाया गया, जहां अदालत ने उसे 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

यह हाई-प्रोफाइल मामला 2023 में चतुःश्रृंगी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। शिकायत 20 अप्रैल 2023 को दर्ज हुई थी, जिसके बाद जांच पुणे शहर की आर्थिक अपराध शाखा को सौंपी गई। जांच में पता चला कि बाणेर स्थित एपीएस वेल्थ वेंचर्स एलएलपी के संचालक अविनाश अर्जुन राठौड़ और उसकी पत्नी विशाखा अविनाश राठौड़ ने निवेशकों को कम समय में बहुत ज्यादा और आकर्षक रिटर्न देने का वादा किया था। उन्होंने लोगों से बाकायदा निवेश समझौते भी किए, लेकिन बाद में इन समझौतों का पालन नहीं किया और निवेशकों के पैसे वापस नहीं लौटाए। शिकायतकर्ता ने कंपनी में 86 लाख 37 हजार 500 रुपये का निवेश किया था, जो उसे वापस नहीं मिला।
जांच आगे बढ़ने पर यह साफ हुआ कि यह ठगी सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं थी। बड़ी संख्या में लोगों से इसी तरह निवेश कराया गया था और कुल मिलाकर करीब 88 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई थी। मामला दर्ज होने के बाद अविनाश और उसकी पत्नी विशाखा दोनों फरार हो गए थे। पुलिस को आशंका थी कि वे देश छोड़कर विदेश भाग सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, 24 अप्रैल 2024 को दोनों आरोपियों के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया था। इसका मकसद यह था कि वे भारत से बाहर न जा सकें या विदेश से लौटते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सके।

इसके बाद, पुणे के विशेष एमपीआईडी न्यायालय, शिवाजीनगर ने दोनों आरोपियों के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। साथ ही, उन्हें भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी और उनके पासपोर्ट भी निलंबित कर दिए गए थे। देशभर में तलाश करने के बावजूद जब सफलता नहीं मिली, तो पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद लेने का फैसला किया। 4 जून 2026 को दोनों आरोपियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया। इसी नोटिस के आधार पर यूएई की संबंधित एजेंसियों ने अविनाश अर्जुन राठौड़ को हिरासत में लिया।

23 जुलाई 2026 को, आरोपी को भारत प्रत्यर्पित किया गया। मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद, आरोपी को पुणे लाया गया और अदालत में पेश किया गया। अदालत ने विस्तृत पूछताछ के लिए उसे 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

आर्थिक अपराध शाखा अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि निवेशकों से जुटाए गए 88 करोड़ रुपये कहां और किस तरह खर्च किए गए। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस पूरे ठगी के नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि कितनी संपत्तियां खरीदी गईं, क्या रकम विदेश भेजी गई थी, और अन्य सहयोगियों की क्या भूमिका रही। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपी से पूछताछ के दौरान इस कथित ठगी के पूरे नेटवर्क और निवेशकों के पैसे के प्रवाह से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

पुणे पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मामले में जो अन्य आरोपी अभी भी विदेशों में छिपे हुए हैं, उन्हें भी कानूनी प्रक्रिया के तहत भारत लाने की कार्रवाई तेजी से चल रही है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ लगातार तालमेल बिठाया जा रहा है। यह मामला निवेशकों के लिए एक बड़ा झटका था, जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई को अधिक मुनाफे के लालच में गंवा दिया। पुलिस की यह कार्रवाई उन सभी लोगों के लिए एक संदेश है जो अवैध तरीके से पैसा कमाने की फिराक में रहते हैं।

यह पूरा मामला एक सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था, जिसमें निवेशकों को लुभावने वादे करके फंसाया गया। कंपनी के संचालकों ने विश्वास का फायदा उठाया और लोगों की मेहनत की कमाई को हड़प लिया। जब निवेशकों को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी फरार हो गए। पुलिस की तत्परता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के कारण ही मुख्य आरोपी को पकड़ा जा सका है। अब उम्मीद है कि बाकी आरोपी भी जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे और निवेशकों को उनका पैसा वापस मिल सकेगा।

इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए निवेशकों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए। किसी भी योजना में निवेश करने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल करनी चाहिए और कंपनी की विश्वसनीयता को परखना चाहिए। लुभावने वादों के चक्कर में पड़कर जल्दबाजी में कोई भी फैसला नहीं लेना चाहिए। वित्तीय सलाहकार से सलाह लेना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। पुलिस और नियामक संस्थाएं भी निवेशकों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर अभियान चलाती रहती हैं, जिनका लाभ उठाना चाहिए। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि लालच का अंत बुरा होता है और ईमानदारी से कमाया गया पैसा ही टिकाऊ होता है।

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