Neet पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक कोर्ट शुरू, 10 साल तक की जेल का प्रावधान
NEET पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक कोर्ट शुरू, 10 साल तक की जेल का प्रावधान
NewsPoint•
नई दिल्ली, 25 जुलाई। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों पर अब तेजी से सुनवाई होगी। दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में इसके लिए एक स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने काम शुरू कर दिया है। कोर्ट नंबर 408 में बनी इस खास अदालत की स्पेशल जज अनु ग्रोवर बालिगा ने शनिवार को अपना चार्ज संभाला। दिल्ली हाईकोर्ट ने पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी से जुड़े आपराधिक मामलों को जल्दी निपटाने के लिए यह स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई है। इसका मकसद है कि ऐसे मामलों का फैसला जल्द हो और दोषियों को सजा मिले।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीट और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने पूरे देश में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला किया था। उन्होंने कहा था कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। इसी घोषणा के बाद न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।केंद्र सरकार भी पेपर लीक को पूरी तरह रोकने के लिए कानून को और कड़ा बनाने की तैयारी में है। शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट ने ‘द पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024’ में संशोधन के लिए एक मसौदा विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य सरकारी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल जैसी घटनाओं को रोकना है। पेपर लीक के बड़े और संगठित मामलों से जुड़े इस बिल में 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। यह मौजूदा कानून से काफी ज्यादा है। अभी के कानून के मुताबिक, अकेले गड़बड़ी करने वालों को 3 से 5 साल की सजा हो सकती है। वहीं, पेपर लीक और नकल से जुड़े संगठित अपराधों के लिए 5 से 10 साल की जेल और कम से कम 1 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
यह स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट उन सभी आपराधिक मामलों को देखेगी जिनमें पेपर लीक या परीक्षाओं में अनुचित साधनों का इस्तेमाल हुआ है। इसका सीधा मतलब है कि अब ऐसे मामलों में देरी नहीं होगी और दोषियों को जल्दी सजा मिलेगी। यह कदम छात्रों के भरोसे को फिर से जगाने और परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है।
प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा के बाद से ही सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है। फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन इसी का एक हिस्सा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो लोग परीक्षाओं की पवित्रता को भंग करते हैं, उन्हें तुरंत न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाए।
नए प्रस्तावित कानून में जुर्माने और सजा की राशि को बढ़ाने का मतलब है कि सरकार पेपर लीक को लेकर कितनी गंभीर है। 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना और 10 साल तक की जेल, यह साफ दिखाता है कि ऐसे अपराधों को अब बहुत गंभीरता से लिया जाएगा। यह उन लोगों के लिए एक बड़ा सबक होगा जो परीक्षाओं को मजाक समझते हैं और छात्रों के भविष्य से खेलते हैं।
यह कदम उन लाखों छात्रों के लिए राहत की खबर है जो कड़ी मेहनत करके परीक्षाओं में बैठते हैं और पेपर लीक जैसी घटनाओं से उनका मनोबल टूट जाता है। अब उन्हें उम्मीद है कि उनकी मेहनत का फल उन्हें जरूर मिलेगा और परीक्षाओं का माहौल निष्पक्ष रहेगा।