अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प की ईरान युद्ध को वजह मानने के बाद रिपब्लिकन पार्टी का नुकसान

NewsPoint•
Navbharat Times
अमेरिका के मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को जो नुकसान हुआ, उसके पीछे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के संग युद्ध को एक बड़ी वजह माना है। ट्रम्प ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई जरूरी थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें फिर से यह फैसला लेने का मौका मिलता है, तो वह फिर से ईरान पर हमला करेंगे। चुनावी नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत मिल गया है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान झेलना पड़ा है।

मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा, "ईरान युद्ध के कारण कुछ समय के लिए पेट्रोल की कीमतें बढ़ गई थीं।" इसके बावजूद, वह अपने फैसले को सही मानते हैं। मिडटर्म चुनावों में 435 सीटों में से डेमोक्रेटिक पार्टी ने 242 सीटें जीतीं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी ने 151 सीटों पर जीत हासिल की है। अभी भी 42 सीटों पर मतगणना चल रही है।
सीनेट में भी रिपब्लिकन को एक और झटका लगा है। सीनेट की कुल 100 सीटों में से 35 पर चुनाव हुए। यहां डेमोक्रेटिक पार्टी ने 20 सीटें जीतीं, वहीं रिपब्लिकन को 13 सीटें मिलीं। बाकी दो सीटों पर नतीजे अभी आना बाकी हैं। इस हिसाब से डेमोक्रेट्स के पास कुल 54 सीटें हो गई हैं, जबकि रिपब्लिकन के पास केवल 44 सीटें रह गई हैं।

गवर्नर चुनाव में भी डेमोक्रेट्स का दबदबा है। अमेरिका के 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए चुनाव हुए। इनमें से 34 राज्यों के नतीजे आ चुके हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी ने 22 और रिपब्लिकन पार्टी ने 12 सीटों पर जीत दर्ज की है। दो राज्यों में मतगणना अभी भी चल रही है।

हार के बाद, रिपब्लिकन पार्टी में मतभेद उभरने लगे हैं। पार्टी के नेता एक-दूसरे पर हार का ठीकरा फोड़ रहे हैं। BBC की रिपोर्ट के अनुसार, मतदाताओं में ईरान युद्ध को लेकर ट्रम्प के फैसले से नाराजगी देखने को मिली। ट्रम्प के करीबी सहयोगी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस युद्ध को चुनावी हार की मुख्य वजह बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि हार की समीक्षा करते समय सबसे पहले युद्ध के प्रभाव पर चर्चा होनी चाहिए।

इस चुनावी नतीजे को ट्रम्प प्रशासन के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। चुनाव से पहले जब ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का फैसला लिया था, तब से ही इसके परिणामों की चिंता थी। अब देखना बाकी है कि ट्रम्प की स्थिति चुनावी नतीजों के बाद कैसे बदलती है और वह अपने समर्थकों के बीच कैसे अपनी छवि बनाए रखते हैं।

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