पीपीएससी मेन्स परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं पर भाजपा नेताओं ने सरकार से मांगी सीबीआई जांच

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Navbharat Times
पंजाब में पीपीएससी मेन्स परीक्षा के नतीजों को लेकर सियासी बवाल मच गया है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने भगवंत मान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। इन नेताओं ने कहा कि एक कमरे से अनेक उम्मीदवारों का चयन होना आसमान से गिरे तारे जैसा अद्भुत है। उन्होंने कहा कि यह मेहनती युवाओं के साथ धोखा है, जो मेहनत करके इन परीक्षाओं में भाग लेते हैं।

रवनीत बिट्टू ने अपनी बात 'एक्स' पर साझा करते हुए लिखा कि भगवंत मान सरकार ने नौकरियां देने के जो दावे किए थे, वे नतीजों ने पूरी तरह से झूठे साबित कर दिए हैं। बिट्टू ने बताया कि सेंटर-7 के कमरा नंबर 8 में 24 में से 11 उम्मीदवार चयनित हुए, जो कि 45.8 प्रतिशत बनता है। वहीं, सेंटर-11 और सेंटर-4 से 10-10 उम्मीदवारों का चयन होना, जो कि 41.7 प्रतिशत है, भी ध्यान देने योग्य है। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षा में एक ही कमरे से इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का पास होना महज संयोग नहीं हो सकता।
बिट्टू ने आगे कहा कि जहां सेंटर-8 की शॉर्टलिस्टिंग दर 24.21 प्रतिशत थी, वहीं सेंटर-1 के कमरे नंबर 1 से 7 तक यह दर मात्र 2.89 प्रतिशत रही। यानी एक ही परीक्षा में विभिन्न केंद्रों के बीच इतना बड़ा अंतर पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने मांग की कि अगर सरकार वास्तव में ईमानदार है, तो आज ही साक्षात्कार प्रक्रिया रोकनी चाहिए। इसके साथ ही परीक्षाओं की कॉपियों को सील कर दिया जाए और मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने भी 'एक्स' पर पोस्ट करके पीसीएस मेन्स के नतीजों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों के आरोपों ने मान सरकार के 'ईमानदार शासन' के खोखले दावों को उजागर कर दिया है। उन्होंने बताया कि चार सेंटरों में एक ही कमरे से 10-11 उम्मीदवारों का चयन हुआ। अनागरिकों के परीक्षा में अनुपस्थित उम्मीदवारों के रोल नंबर भी आए, जो और भी संदेह पैदा करते हैं। ढिल्लों ने कहा कि आंसर शीट का मूल्यांकन विषय के जानकारों के बजाय विश्वविद्यालय के छात्रों ने किया। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल की सरकार ने पंजाब को लूट का अड्डा बना दिया है। उन्होंने मांग की कि चुनावी प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए और या तो किसी उच्च न्यायालय के जज की निगरानी में जांच हो या सीबीआई जांच हो। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत एफआईआर कराई जाए।

सुनील जाखड़ ने भी इस मुद्दे पर ध्यान खींचते हुए उसे नीट पेपर लीक मामले के समान बताया। उन्होंने सवाल किया, "पीसीएस परीक्षा और नीट पेपर लीक मामले में क्या अंतर है?" उन्होंने कहा कि पहले नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ। इसके बाद बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी में पैरामेडिकल स्टाफ भर्ती परीक्षा का पेपर भी लीक हुआ। अब उन्होंने कहा कि पीपीएससी मेन्स परीक्षा में धांधली की गई है, जिससे पीसीएस प्रीलिम्स परीक्षा को हाईजैक कर लिया गया है। जाखड़ ने कहा कि यह कहीं न कहीं एक पूर्वाग्रहित साजिश की ओर इशारा करता है।

उन्होंने कहा कि यह कैसे हो सकता है कि सिविल सेवा जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षा में लगभग एक चौथाई उम्मीदवारों का चयन केवल कुछ विशेष परीक्षा केंद्रों से हो जाए? उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार को भर्ती परीक्षाओं में ऐसी अनियमितताओं के आरोपों का सामना लगातार करना पड़ा है। जाखड़ ने कहा कि यह पंजाब के युवाओं के सपनों और भविष्य का सवाल है। ऐसे में इस विवाद की पूरी जांच सीबीआई से कराना बेहद जरूरी है ताकि सत्यता सामने आ सके और हर किसी के सामने सभी तथ्य प्रस्तुत किए जा सकें।

भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू, केवल सिंह ढिल्लों और सुनील जाखड़ ने एक स्वर में कहा कि पंजाब के मेहनती युवाओं के हक की लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भाजपा इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जब सरकार ने बिना सिफारिश और बिना रिश्वत नौकरियां देने का दावा किया था, तो अब जो नतीजे सामने आए हैं, वे उन दावों की पोल खोल रहे हैं।

इस मुद्दे ने राजनीतिक गलियारे में एक नई बहस छेड़ दी है और देखना यह है कि आने वाले दिनों में सरकार इस पर क्या कदम उठाती है। सभी की निगाहें इस मामले की जांच और उससे जुड़े परिणामों पर हैं। भाजपा नेताओं ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भगवंत मान सरकार इस विवाद का समाधान निकाल पाएगी या नहीं।

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