ईडी ने ऑनलाइन धोखाधड़ी मामले में दो आरोपियों रोशन फियाज और अम्मार को किया गिरफ्तार
ईडी ने ऑनलाइन धोखाधड़ी मामले में दो आरोपियों रोशन फियाज और अम्मार को किया गिरफ्तार
NewsPoint•
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चेन्नई में 5 नवंबर को दो लोगों को गिरफ्तार किया है। ये लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल थे। गिरफ्तार आरोपियों के नाम रोशन फियाज और अम्मार हैं। यह कार्रवाई 'मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम' (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। ईडी की जांच में पता चला है कि आरोपियों ने धोखाधड़ी से मिली रकम को 'म्यूल' बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी (यूएसडीटी) के नेटवर्क के माध्यम से छिपाया और लॉन्डर किया।
ईडी ने अपनी आधिकारिक बयान में बताया कि यह जांच तमिलनाडु और तेलंगाना की पुलिस द्वारा दर्ज दो एफआईआर पर आधारित है। एक एफआईआर तमिलनाडु पुलिस के 'स्टेट साइबर क्राइम कमांड सेंटर' ने दर्ज की थी। दूसरी एफआईआर तेलंगाना के साइबराबाद स्थित 'साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन' में दर्ज की गई थी। इन मामलों को भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दर्ज किया गया था।आरोपी पीड़ितों से विभिन्न निवेश योजनाओं, नौकरियों, शेयर बाजार में निवेश जैसे तरीकों द्वारा धोखाधड़ी करने के लिए संपर्क करते थे। वे सोशल मीडिया और फोन के जरिए लोगों को लुभाते थे। इसके बाद, पीड़ित जालसाजों के बताए गए 'म्यूल' खातों में पैसे ट्रांसफर कर देते थे। इन पैसे को फिर कई अन्य 'म्यूल' खातों में छोटे हिस्सों में बांटा जाता था। अंत में, कुछ धन नकद निकाला जाता था और शेष क्रिप्टोकरेंसी में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
जांच से यह भी सामने आया कि तेलंगाना, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में दर्ज 10 अन्य एफआईआर भी इसी नेटवर्क से जुड़ी हैं। साथ ही, इसी नेटवर्क के अंतर्गत साइबर अपराध की 600 से अधिक शिकायतें मिली हैं। यह सारे अपराध मिलकर 400 करोड़ रुपए से अधिक की रकम की चोरी करने में शामिल हैं, जिसे आरोपियों ने विभिन्न 'म्यूल' खातों और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए स्थानांतरित किया है।
रोशन फियाज जांच के दौरान मुख्य अभियुक्त पाया गया। उसने अपने और अपनी पत्नी के नाम पर कई 'म्यूल' बैंक खातों का एक जाल तैयार कर रखा था। इन खातों में 300 करोड़ रुपए का डेबिट और क्रेडिट लेन-देन किया गया है। पीड़ितों से वसूली गई रकम को अलग-अलग बैंकों के जरिए घुमाया गया और अंतिम रूप में क्रिप्टो वॉलेट के माध्यम से यूएसडीटी में बदला गया।
अम्मार भी इस मामले में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति पाया गया। वह विभिन्न लोगों और संस्थाओं के बैंक खातों की उपलब्धता सुनिश्चित करता था। वह रोशन को अकाउंट किट, नेट-बैंकिंग क्रेडेंशियल्स, सिम कार्ड, मोबाइल फोन और ईमेल आईडी भी मुहैया करता था, ताकि क्रिप्टो खरीदारों से भारतीय रुपए प्राप्त किए जा सकें।
ईडी ने पहले ही पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत रोशन फियाज, अम्मार और उनसे जुड़े स्थानों पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान 14.50 लाख रुपए नकद और 3.26 करोड़ रुपए की क्रिप्टोकरेंसी जब्त की गई थी। इससे पहले, कई बैंक खातों में मौजूद लगभग 88.28 लाख रुपए को भी फ्रीज कर दिया गया था।
गिरफ्तार दो आरोपियों को चेन्नई की पीएमएलए विशेष अदालत के सामने पेश किया गया, जहां उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस मामले में जांच जारी है और ईडी ने कहा है कि वे इस नेटवर्क के अन्य आरोपियों का भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं।
इस तरह की धोखाधड़ी को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। खासकर ऑनलाइन निवेश के मामले में सतर्कता बरतनी चाहिए। जालसाज अक्सर नए तरीकों के जरिए लोगों को ललचाते हैं। इसलिए, किसी भी निवेश योजना में जाने से पहले पूरी जानकारी और सतर्कता जरूरी है।