मंत्री विश्वास सारंग ने दिग्विजय सिंह पर हिंदुत्व के नाम पर समाज को बांटने का आरोप लगाया
मंत्री विश्वास सारंग ने दिग्विजय सिंह पर हिंदुत्व के नाम पर समाज को बांटने का आरोप लगाया
NewsPoint•
भोपाल, 5 नवंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने गुरुवार को कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के 'हिंदुत्व' से जुड़े बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि दिग्विजय समाज को बांटने की राजनीति कर रहे हैं। दिग्विजय ने गुना दौरे में कहा कि सनातन धर्म सभी धर्मों का सम्मान करता है और विश्व के कल्याण की बात करता है। इस बयान पर प्रतिक्रिया करते हुए मंत्री सारंग ने कहा कि दिग्विजय की 'सनातन यात्रा' वास्तव में समाज में विभाजन पैदा करने वाली यात्रा है।
सारंग ने कहा, "दिग्विजय सिंह की सनातन यात्रा विखंडन की यात्रा है। यह हिंदू धर्म और सनातन विचारधारा को बदनाम करने की यात्रा है।" उन्होंने आगे कहा, "जो व्यक्ति जाकिर नाइक जैसे राष्ट्रविरोधी और हिंदू विरोधी व्यक्ति का महिमामंडन करता है, क्या वह हमें हिंदुत्व की परिभाषा सिखाएगा? क्या वह हमें सनातन का पाठ पढ़ाएगा? आज दिग्विजय सिंह ने कहा कि हिंदू नफरत फैलाते हैं और समाज को बांटते हैं।"सारंग ने आरोप लगाया कि दिग्विजय खुद को सनातन धर्म का अनुयायी बताते हैं, लेकिन उनके बयान हिंदुओं के खिलाफ होते हैं। उन्होंने कहा, "क्या वह केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए इतना नीचे गिर जाएंगे? यह बेहद आपत्तिजनक है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" यह बयान एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे सकता है।
दिग्विजय सिंह का इतिहास देखे तो वह लगातार अपने सनातन धर्म संबंधी बयानों के लिए चर्चित रहे हैं। इससे पहले भी इस विषय पर विवाद उठ चुके हैं। शिवसेना नेता शाइना एनसी ने दिग्विजय पर 'छद्म धर्मनिरपेक्षता' की नीति अपनाने का आरोप लगाया था। जब दिग्विजय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह दिया कि वह सनातन धर्म में विश्वास रखते हैं, लेकिन सनातन धर्म और हिंदू धर्म को अलग मानते हैं, तब विवाद और गहरा गया।
दिग्विजय ने यह भी कहा कि 'हिंदुइज्म' शब्द को विनायक दामोदर सावरकर ने प्रचलित किया और हिंदू धर्म का समानता से कोई संबंध नहीं है। सनातन धर्म की अपनी व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी मां ने उन्हें सिखाया था कि सनातन धर्म प्रेम, स्नेह और करुणा का प्रतीक है। इस पर शाइना एनसी ने कहा, "दिग्विजय सिंह खुद स्वीकार करते हैं कि वह सनातन धर्म को मानते हैं। कांग्रेस पार्टी छद्म धर्मनिरपेक्षता की राजनीति करती है। यह सब वोटों के लिए किया जाता है और लोगों को खुश करने की कोशिश जारी रहती है।"
इस मामले में दिग्विजय के पुराने बयानों के विरोधाभास और भ्रम स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। उनके एक बयान से दूसरे बयान में बदलाव देखना लोगों के लिए आसान है। इस तरह के बयानों से समाज में और अधिक विभाजन पैदा हो सकता है, जो राजनीति के लिए अच् छा नहीं है।
यही कारण है कि अब विश्वास सारंग जैसे नेता इस तरह के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। नेता अपनी अपनी राजनैतिक रोटियों को सेंकने के स्थान पर समाज की एकता के लिए आगे आएं। ऐसी स्थिति में सभी पक्षों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।
इस प्रकार, दिग्विजय का यह विवादित बयान और उससे जुड़ी प्रतिक्रियाएं निश्चित ही चर्चा का विषय बनी रहेंगी।