आरबीआई ने कृषि ऋणों के लिए दस्तावेजी सत्यापन को सख्त बनाने का प्रस्ताव रखा
आरबीआई ने कृषि ऋणों के लिए दस्तावेजी सत्यापन को सख्त बनाने का प्रस्ताव रखा
NewsPoint•
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कृषि ऋणों के लिए नियमों में बदलाव का प्रस्ताव किया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य कृषि ऋण वितरण को बेहतर तरीके से मॉनिटर करना है। आरबीआई ने 7 नवंबर को बताया कि यह नया नियम प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाएगा। आरबीआई ने इस मसौदे पर सुझाव देने की अंतिम तिथि 26 नवंबर रखी है।
आरबीआई के मसौदे के मुताबिक, कृषि ऋणों के लिए दस्तावेजों की जांच पहले से सख्त की जाएगी। विशेष रूप से व्यापारिक बिलों और कृषि भूमि के विवरण को लेकर अधिक स्पष्टता की आवश्यकता होगी। बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कृषि गतिविधियों के लिए दिए गए ऋण सिर्फ सोने की गिरवी पर निर्भर न हों। आरबीआई ने कहा, "ऋण राशि का निर्धारण कृषि गतिविधि की वास्तविक वित्तीय जरूरत पर आधारित होना चाहिए, न कि गिरवी संपत्ति के मूल्य पर।"सूत्रों के अनुसार, ऋण का उपयोग कैसे किया जा रहा है, इसकी निगरानी भी की जाएगी। बैंक अधिकारियों को फील्ड विजिट का रिकॉर्ड रखने की आवश्यकता होगी। यह कदम उन भूमिहीन कृषि मजदूरों और बटाईदार किसानों के लिए खास है, जिनके पास भूमि के रिकॉर्ड नहीं होते। ऐसे मामलों में अन्य दस्तावेजों का उपयोग किया जाएगा ताकि पात्रता साबित की जा सके।
इसके अलावा, आरबीआई ने प्राथमिकता क्षेत्र ऋण की गणना में कुछ परिवर्तन भी प्रस्तावित किए हैं। उन्होंने लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) के तहत डिस्काउंट किए गए व्यापारिक बिलों का लेखांकन करने के तरीके में बदलाव की बात की है। मसौदे में कहा गया है, "ऐसे बिलों को नेट बैंक क्रेडिट (एनबीसी) और समायोजित नेट बैंक क्रेडिट (एएनबीसी) की गणना से बाहर नहीं रखा जाएगा।" आरबीआई का यह भी मानना है कि बैंक इन एक्सपोजर को जोखिम और पूंजी पर्याप्तता की गणनाओं में इंटरबैंक एक्सपोजर के रूप में देख सकते हैं।
इस नए नियम के लागू होने से कृषि क्षेत्र में ऋण वितरण की प्रक्रिया में सुधार आएगा। इससे किसानों को कई प्रकार के ऋण सुविधाएं मिलेंगी, जो उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुसार होंगी। यह बदलाव न केवल कृषि ऋण की पारदर्शिता को बढ़ाएगा, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था को भी मजबूत करेगा। उम्मीद की जा रही है कि इस बदलाव से किसानों को उनके लिए अधिक उपयुक्त और सस्ती ऋण सुविधाएं मिलेंगी।
इस प्रकार आरबीआई के नए प्रस्ताव से कृषि क्षेत्र में ऋण लेने वालों को बड़े फायदे मिल सकते हैं। यह बदलाव सही दिशा में एक कदम है, जो भारतीय कृषि को और मजबूत बनाएगा।