पाकिस्तान का कर्ज 2025 में बढ़ेगा, चीन और IMF से मिली नई आर्थिक सहायता के साथ

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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में, चीन ने पाकिस्तान को दिए गए 2 अरब डॉलर के कर्ज की भुगतान अवधि को बढ़ा दिया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान को 2.3 अरब डॉलर की नई वित्तीय सहायता दी है। इस सहायता का उद्देश्य पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की स्थिरता को मजबूत करना है। यह सब तब हो रहा है जब निम्न और मध्यम आय वाले देशों (LMIC) का बाहरी कर्ज भी तेजी से बढ़ता जा रहा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में, निम्न और मध्यम आय वाले देशों का बाहरी कर्ज 9.4 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। 2025 में, इन देशों का कर्ज 5.5 प्रतिशत बढ़ा है। यह पिछले चार वर्षों में सबसे बड़ी सालाना वृद्धि है। इस वृद्धि के पीछे कुछ मुख्य कारण हैं, जैसे बॉंड जारी करने में बढ़ोतरी, अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में निवेशकों का फिर से भरोसा।
हालांकि, ऐसे देशों को जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है, उन्हें उच्च ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ रहा है। रिपोर्ट का मानना है कि जिन देशों की कर्ज चुकाने की क्षमता कम है, उन्हें ही सबसे ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेना पड़ रहा है। इसका मतलब यह है कि ये सरकारें अपने कर्ज के लिए भारी कीमत चुका रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय विकास संघ (IDA) से वित्तीय सहायता पाने वाले देशों का बाहरी कर्ज 8.1 प्रतिशत बढ़कर 1.3 लाख करोड़ डॉलर पहुंच गया है। निम्न आय वाले देशों का बाहरी कर्ज 8.9 प्रतिशत बढ़कर 262.4 अरब डॉलर हो गया है। यह पिछले तीन वर्षों में सबसे बड़ी वृद्धि है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निम्न और मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं में निजी क्षेत्र के कर्ज में 5.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अर्थव्यवस्थाओं के बेहतर प्रदर्शन से कर्जदाताओं का इन बाजारों में भरोसा बढ़ा है। हालांकि, कई सरकारें काफी ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेती रही हैं।

इसमें सबसे बड़ी चिंता यह है कि गरीब देशों को सबसे महंगे कर्ज का सामना करना पड़ रहा है। विकसित देशों के साथ तुलना की जाए तो उनके लिए कर्ज लेना आसान है। इसमें निजी वित्तपोषण पर बढ़ती निर्भरता भी एक कारण है। इससे IDA की सहायता के पात्र देशों के लिए कर्ज लेना और महंगा हो गया है।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय ऋण बाजार में कर्ज देने की गतिविधियाँ फिर से शुरू होने से विकासशील देशों को कुछ राहत मिली है। लेकिन बढ़ते कर्ज, महंगा निजी वित्तपोषण और भुगतान की बढ़ती देनदारियां इन क्षेत्रों की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।

इस तरह, पाकिस्तान और अन्य निम्न और मध्यम आय वाले देशों को अपनी आर्थिक स्थिरता के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यह सिर्फ उनके लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

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