भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की भारी खरीदारी से हुई 8 प्रतिशत की तेजी
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की भारी खरीदारी से हुई 8 प्रतिशत की तेजी
NewsPoint•
मुंबई, 7 नवंबर (आईएएनएस)। विदेशी निवेशकों की मजबूत खरीदारी और घरेलू आर्थिक संकेतकों के आधार पर भारतीय शेयर बाजार ने इस सप्ताह बेहतरीन प्रदर्शन किया। यह एक साल से अधिक समय में बाजार की सबसे तेजी है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने 8 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दिखाई। निफ्टी ने सप्ताह के दौरान 8.58 प्रतिशत की उछाल दर्ज की और अंत में 25,030 के स्तर पर पहुँच गया। वहीं, सेंसेक्स शुक्रवार को 1,718 अंक या 2.17 प्रतिशत बढ़कर 81,028 पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स की बढ़त 8.82 प्रतिशत रही।
इस तेजी का मुख्य कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की वापसी है। FII ने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 45,960 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया। यह पिछले कई हफ्तों से बिकवाली के दौर के बाद एक बड़ा बदलाव है। इस रैली में बैंकिंग शेयरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बैंक निफ्टी ने भी करीब 8 प्रतिशत की बढ़त दिखाई। उद्योग के कई और क्षेत्रों, जैसे वित्तीय सेवाएं, प्राइवेट बैंक, रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स ने अच्छा प्रदर्शन किया। विश्लेषकों का कहना है कि मजबूत दूसरी तिमाही के परिणाम, बेहतर ऑटो बिक्री और मजबूत जीएसटी संग्रह ने बाजार के लिए अच्छा आधार तैयार किया। इसके अलावा, अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजों ने भी निवेशकों की धारणा को सकारात्मक किया। निवेशकों को उम्मीद है कि इससे ईरान से जुड़े तनाव में कमी आएगी और व्यापार शुल्कों को लेकर नरम रुख अपनाया जाएगा।
बाजार की तेजी केवल बड़े शेयरों में ही नहीं रही, छोटे और मिडकैप शेयरों ने भी अच्छी बढ़त दिखायी। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक में 5.77 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 ने 2.77 प्रतिशत की उछाल दर्ज की।
हालांकि, इस दौरान अमेरिकी बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई। गुरुवार को अमेरिकी बाजार में बिकवाली से S&P 500 कंपनियों के बाजार मूल्य में लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर की कमी आई। इसका प्रभाव एशिया के कई तकनीक-प्रधान बाजारों में भी देखा गया। फिर भी, भारतीय बाजार एक सुरक्षित निवेश गंतव्य के रूप में उभरा है।
बाजार की धारणा को समर्थन मिला अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को स्थिर रखने के निर्णय से। इसके साथ, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट भी भारत जैसे आयातक देश के लिए अच्छी खबर थी। सप्ताह के दौरान, WTI कच्चा तेल 104-105 डॉलर प्रति बैरल से घटकर करीब 90 डॉलर पर आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 97-98 डॉलर के दायरे में पहुंच गया। दोनों बेंचमार्क में साप्ताहिक आधार पर 12 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट हुई।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले सप्ताहों में अमेरिकी रोजगार आंकड़े और अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) डेटा global markets की दिशा तय करने में अहम होंगे। वहीं, घरेलू स्तर पर निवेशकों की नजर महंगाई के आंकड़ों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी का यह सिलसिला जारी रहा और वैश्विक परिस्थिति अनुकूल बनी, तो भारतीय बाजारों में तेजी का रुख आगे भी बना रह सकता है। इस प्रकार, निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण समय है। जल्द ही हमें और भी अच्छे संकेत मिल सकते हैं, जो बाजार को और भी ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं।