जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े आजम खां पर एफआईआर, ईडी का धन शोधन और भ्रष्टाचार का आरोप
जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े आजम खां पर एफआईआर, ईडी का धन शोधन और भ्रष्टाचार का आरोप
NewsPoint•
रामपुर में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 13 अक्टूबर को जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी धन और सामग्री के कथित दुरुपयोग के मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। इस एफआईआर में आजम खां, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के अन्य सदस्यों और कुछ ठेकेदारों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के मुताबिक, यूनिवर्सिटी की निर्माण लागत लगभग 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई है।
ईडी ने अपने आरोपों में कहा है कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 2013-14 से 2024-25 के बीच केवल 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च बताया। लेकिन, इसमें 416.14 करोड़ रुपये का अंतर पाया गया है। इस मामले में भष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराएं लगाई गई हैं। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 61, 316(5) और 318(4) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं 7, 13(1)(d) और 13(2) शामिल हैं।ईडी ने आरोप लगाया है कि यूनिवर्सिटी परिसर में सरकारी धनराशि और निर्माण सामग्री का दुरुपयोग किया गया। एजेंसी ने ठेकेदारों से जुड़े कार्यों का भी जिक्र किया है। इसमें 55.8 करोड़ रुपये के ठेकेदारों के निर्माण कार्य, 23.41 करोड़ रुपये के सरकारी कार्य और 6.60 करोड़ रुपये के विधायक एवं विधान परिषद क्षेत्र विकास निधि के कार्य शामिल हैं। इन सभी मदों की कुल राशि करीब 85.81 करोड़ रुपये बताई गई है।
ईडी ने यह भी बताया कि कुछ दान जो ट्रस्ट को मिले, उनकी वास्तविकता पर सवाल उठाया गया है। एजेंसी को संदेह है कि ठेकेदारों के माध्यम से कुछ रकम ट्रस्ट तक पहुंचाई गई जो वास्तव में दान के रूप में दर्शाई गई। जांच में प्राप्त बयानों और दस्तावेजों के आधार पर सरकारी धन और निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की पड़ताल की जाएगी।
आजम खां और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की भूमिका की जांच जारी है। हालांकि एफआईआर में लगाए गए सभी आरोप अभी जांच के चरण में हैं। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या होता है। इस मामले ने समाजवादी पार्टी के नेताओं और उनके समर्थकों में एक नई हलचल पैदा कर दी है। सभी की नजरें अब आने वाले दिनों में होने वाली कार्रवाई पर टिक गई हैं।