एआईएडीएमके में पलानीस्वामी ने 100 से अधिक पदाधिकारियों को हटाया, नेतृत्व संकट गहरा

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चेन्नई, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने विल्लुपुरम जिले में पूर्व मंत्री सीवी शनमुगम से जुड़े 100 से अधिक पार्टी पदाधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया है। यह कदम पार्टी के अंदर चल रहे आंतरिक संघर्ष के कारण उठाया गया है। हाल की चुनावी हार के बाद, पार्टी में असंतोष बढ़ गया है। यह कार्रवाई मयिलम यूनियन के पदाधिकारियों के खिलाफ हुई है, जो कि शनमुगम के क्षेत्र से संबंधित हैं। इसके तहत उन पदाधिकारियों को शामिल किया गया है जो यूनियन स्तर और शाखा सचिव हैं।

पार्टी के भीतर स्थिति तब और भी गंभीर हो गई जब कुछ वरिष्ठ नेता जैसे शनमुगम और एस.पी. वेलुमणि ने 'जनरल काउंसिल' की बैठक की मांग की है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पार्टी की हालिया चुनावी हारों पर चर्चा करना है। एआईएडीएमके के भीतर तनाव तब बढ़ा जब अप्रैल में विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। शनमुगम और वेलुमणि के नेतृत्व में कुछ विधायकों ने पलानीस्वामी के नेतृत्व पर सवाल उठाया, जिससे पार्टी के अंदर फूट पड़ गई। इसके परिणामस्वरूप शनमुगम अपने एक अलग गुट के साथ काम करते रहे, जिससे विल्लुपुरम जिले में पार्टी के भीतर और दरार बढ़ गई।
पलानीस्वामी ने शनमुगम को जिला पार्टी सचिव के पद से हटा दिया है और उनकी जगह पशुपति को नियुक्त किया है। इसके बाद अब दो विरोधी गुट जिले में काम कर रहे हैं। एक गुट शनमुगम के प्रति वफादार है, जबकि दूसरा नए जिला सचिव के नेतृत्व में है। हाल ही में हुए उपचुनावों में एआईएडीएमके को मिले परिणामों ने विवाद को और बढ़ा दिया है। दोनों सीटों पर पार्टी तीसरे स्थान पर रही, जिससे नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। इस हार के कारण पार्टी के भीतर के नेताओं ने फिर से 'जनरल काउंसिल' की बैठक की मांग की है ताकि हार के पीछे के कारणों और नेतृत्व की प्रतिक्रियाओं पर विचार किया जा सके।

पलानीस्वामी ने मयिलम यूनियन में कई पदाधिकारियों को हटाकर अपने नियंत्रण को मजबूत करने की कोशिश की है। ऐसा लगता है कि यह कदम पार्टी के अंदर चल रहे संघर्ष को और स्पष्ट कर रहा है। लगातार हार के बाद पार्टी के भीतर से यह दबाव बढ़ रहा है कि वह अपनी स्थिति को बेहतर बनाए और संगठन को फिर से मजबूत करे। पलानीस्वामी ने समीपता में बागी नेताओं से जुड़े लोगों को उनकी जिम्मेदारियों से हटा दिया है। यह कार्रवाई जुलाई में हुई छंटनी के बाद की गई है, जब शनमुगम को जिला सचिव के पद से हटाने के बाद उनके समर्थकों को भी पार्टी के पदों से छोड़ दिया गया था।

हालांकि ये बदलाव गुटीय विवाद को खत्म नहीं कर पाए हैं। दोनों गुट अब भी अलग-अलग दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि एआईएडीएमके में संघर्ष अब और गहरा रहा है। पार्टी के भीतर चल रहे इस विवाद को सुलझाने के लिए कोई स्पष्ट दिशा नजर नहीं आ रही। पलानीस्वामी की ताजा कार्रवाई ने पार्टी की कमजोरियों को और उजागर कर दिया है।

पार्टी को अब एक मजबूत रणनीति की आवश्यकता है ताकि वे आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। सभी की नजरें आगामी बैठकों और संभावित बदलावों पर टिकी हैं। इस समय एआईएडीएमके को अपने गुटीय विवादों को सुलझाने और एकजुटता की आवश्यकता है ताकि वे राजनीतिक मैदान में अपनी स्थिति को पुनः मजबूत कर सकें।

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