रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे मजबूत होकर 94.75 पर, आरबीआई का समर्थन जारी
रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे मजबूत होकर 94.75 पर, आरबीआई का समर्थन जारी
NewsPoint•
नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे मजबूत होकर 94.75 पर ट्रेंड करता दिखा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हस्तक्षेप ने घरेलू मुद्रा को समर्थन दिया है। सुबह के सत्र में रुपया अपनी पिछली बंद कीमत 94.97 से 8 पैसे की मजबूती के साथ 94.89 पर खुला। विशेषज्ञों का कहना है कि रुपया फिलहाल 95 प्रति डॉलर के स्तर पर बना हुआ है, जिसे आरबीआई की 'सॉफ्ट डिफेंस लाइन' माना जा रहा है। उनका मानना है कि केंद्रीय बैंक द्वारा डॉलर की बिक्री से रुपये में अधिक कमजोरी आने से रोका जा रहा है।
पिछले सप्ताह, रुपया लगभग चार वर्षों में अपने सबसे अच्छे साप्ताहिक प्रदर्शन में सफल रहा। केंद्रीय बैंक के समर्थन और स्पॉट मार्केट में हस्तक्षेप ने घरेलू मुद्रा को मजबूती प्रदान की। आरबीआई ने रुपये को प्राथमिकता देने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में अपनी गतिविधियाँ बढ़ाई हैं। हालाँकि, कच्चे तेल की उच्च कीमतों और पूंजी निकासी का लगातार दबाव बना हुआ है। बाजार के विशेषज्ञ बताते हैं कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने अक्टूबर में 16 अक्टूबर तक कुल 54,636 करोड़ रुपए की बेची गई हैं। यह आंकड़ा सितंबर महीने की तुलना में अधिक है। फिर भी, हाल के दिनों में एफआईआई की बिक्री की गति धीमी हो गई है। 16 अक्टूबर को वे मामूली शुद्ध खरीदार भी बने थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.3 प्रतिशत से घटकर 5.08 प्रतिशत पर आ गई है और रूपए का 95 प्रति डॉलर से नीचे मजबूत होना, एफआईआई के रुख में अस्थायी बदलाव का मुख्य कारण है। उन्होंने बताया कि यह बदलाव फिलहाल रणनीतिक (टैक्टिकल) अधिक और संरचनात्मक (स्ट्रक्चरल) कम प्रतीत हो रहा है। एफआईआई अभी भी वित्तीय और तेल क्षेत्र में बिकवाली कर रहे हैं, जबकि डिजिटल प्लेटफॉर्म, मनोरंजन और स्वास्थ्य सेवा जैसी उपभोक्ता सेवा कंपनियों में उनकी खरीदारी बढ़ी है।
हाल ही में निफ्टी में 2.77 प्रतिशत की तेज बढ़त के कारण एफआईआई को कुछ शॉर्ट कवरिंग करनी पड़ी, जिससे बैंकिंग शेयरों को भी मजबूती मिली। बैंकिंग शेयर हाल के समय में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का सबसे अधिक दबाव झेल रहे थे।
इस बीच, कच्चे तेल की कीमतें बाजार के लिए अभी भी एक बड़ी चिंता बनी हुई हैं। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत मई के बाद पहली बार 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई थी। लेकिन सोमवार को इसमें 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, और यह लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेंड कर रहा था।
विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में यह नरमी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से जुड़े नए प्रतिबंधों और रूसी उत्पादों पर प्रस्तावित शुल्कों में छूट देने के फैसले के बाद आई है। इससे वैश्विक बाजार में रूसी ईंधन की आपूर्ति बढ़ने की संभावनाएँ बन गई हैं।
इस तरह, भारतीय रुपया बाजार में खुद को स्थिर रखने की कोशिश कर रहा है, जबकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और एफआईआई की गतिविधियाँ भी महत्वपूर्ण तत्व हैं। यह सब भारतीय मुद्रा के लिए एक मिश्रित पैटर्न की ओर ले जा रहा है।