Delhi Polices Big Action On Cyber Crime Over 600 Arrested 8300 Suspects Detained
दिल्ली पुलिस का साइबर क्राइम पर बड़ा एक्शन: 600 से ज़्यादा गिरफ्तार, 8300 संदिग्ध हिरासत में
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दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध पर बड़ा एक्शन लिया है। 'ऑपरेशन साइहॉक 4.0' में 600 से अधिक गिरफ्तारियां और 8300 से अधिक हिरासत में लिए गए। यह ऑपरेशन साइबर अपराधियों के आर्थिक तंत्र को तोड़ने के लिए चलाया गया। पुलिस अब सक्रिय रूप से गिरोहों को खत्म कर रही है।
दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ा ऑपरेशन चलाया है। इस ऑपरेशन का नाम ' ऑपरेशन साइहॉक 4.0 ' था। यह 6 और 7 अप्रैल को हुआ। इस दौरान पुलिस ने 600 से ज़्यादा लोगों को गिरफ्तार किया और 8,300 से ज़्यादा संदिग्धों को हिरासत में लिया। यह जानकारी बुधवार को अधिकारियों ने दी। यह ऑपरेशन साइबर अपराधियों के आर्थिक तंत्र और उनके काम करने के तरीके को तोड़ने के लिए चलाया गया था। पुलिस अब सिर्फ प्रतिक्रिया देने के बजाय सक्रिय रूप से साइबर धोखाधड़ी के गिरोहों को खत्म करने पर ध्यान दे रही है।
इस ऑपरेशन में एक बड़े रेस्तरां चेन के मालिक का बेटा भी पकड़ा गया है। पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर (IFSO) राजनेश गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह युवक अपने पिता के रेस्तरां के कारोबार में हुए नुकसान की वजह से साइबर अपराध से कमाए पैसे को अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करने के लिए कमीशन लेता था। उसे हर ट्रांजेक्शन पर तीन प्रतिशत कमीशन मिलता था। उसने अपना यूजर आईडी और पासवर्ड भी अपराधियों को दे दिया था, जिसके ज़रिए चोरी या धोखाधड़ी के पैसे उसके खाते से निकाले गए। पुलिस ने इस मामले में जावेद नाम के युवक को गिरफ्तार किया है और आगे की जांच जारी है।ऑपरेशन के दौरान, कुल 8,371 लोगों को पूछताछ और सत्यापन के लिए उठाया गया था। ये सभी लोग दिल्ली के अलग-अलग जिलों में एक साथ की गई छापेमारी के दौरान पकड़े गए। इनमें से 1,429 ऐसे थे जिन्हें गिरफ्तार किया गया या बाउंड डाउन किया गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जांचकर्ताओं ने उन्हें साइबर धोखाधड़ी की गतिविधियों से जुड़े मज़बूत वित्तीय और तकनीकी सबूतों के साथ पकड़ा। इसके अलावा, 2,203 लोगों को नोटिस भी भेजे गए। ये वो लोग थे जिन पर शक था कि वे ऐसे अपराधों से जुड़े पैसों के पीछे की कड़ी का हिस्सा हो सकते हैं।
पुलिस ने बताया कि इस ऑपरेशन से 499 नए एफआईआर दर्ज हुए। ये एफआईआर उन साइबर ठगों के खिलाफ हैं जिनकी पहचान कर ली गई है। इससे संगठित गिरोहों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का दायरा काफी बढ़ गया है। नए मामलों के अलावा, पुलिस ने 324 पुराने साइबर धोखाधड़ी के मामलों में भी बड़ी सफलता हासिल की है। ऑपरेशन के दौरान मिले डिजिटल और वित्तीय सबूतों के आधार पर कई आरोपियों को पकड़ा गया।
द्वारका में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया जो पूरे भारत में 'म्यूल अकाउंट' (यानी दूसरों के नाम पर खोले गए बैंक खाते जिनका इस्तेमाल अवैध पैसों को घुमाने के लिए होता है) का इस्तेमाल करता था। इस गिरोह ने 67 करोड़ रुपये से ज़्यादा की धोखाधड़ी की थी। छापेमारी के दौरान, पुलिस ने 109 चेकबुक, 12 मोबाइल फोन और चार शेल फर्म (कागजों पर बनी कंपनियां जिनका कोई असली कारोबार नहीं होता) से जुड़े दस्तावेज़ बरामद किए।
दक्षिण-पूर्वी जिले में पुलिस ने एक मैट्रिमोनियल फ्रॉड (शादी के नाम पर धोखाधड़ी) के मामले को सुलझाया। इसमें आरोपी ने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बनाई गई तस्वीरों का इस्तेमाल करके लोगों को धोखा दिया था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
यह बड़ी कार्रवाई खास तौर पर साइबर अपराध के आर्थिक ढांचे को निशाना बनाने के लिए की गई थी। इसमें ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल करने वाले लोग शामिल थे, जिनका इस्तेमाल ठगे गए पैसों को घुमाने और छिपाने के लिए किया जाता था। साथ ही, पैसे निकालने वाले एजेंट और ऑनलाइन ठगी करने वाले कॉल सेंटर भी निशाने पर थे। पुलिस ने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में चल रहे कई अवैध कॉल सेंटरों की पहचान की और उन्हें बंद कर दिया। इससे नौकरी के नाम पर ठगी, डिजिटल गिरफ्तारी का डर दिखाकर ठगी, टेलीमार्केटिंग फ्रॉड और कस्टमर केयर के नाम पर ठगी जैसे कई तरह के अपराध रुके।
जांच के दौरान, पुलिस ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 3,564 शिकायतों को पकड़े गए 'म्यूल अकाउंट' और संदिग्ध मोबाइल नंबरों से जोड़ा। पुलिस ने बताया कि देश भर में दर्ज शिकायतों के ज़रिए ठगे गए 519 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम को संगठित साइबर धोखाधड़ी गिरोहों से जुड़े बैंक खातों तक ट्रेस किया गया।
पुलिस ने कई जगहों पर छापेमारी की और बड़ी मात्रा में डिजिटल सबूत बरामद किए। इनमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड ड्राइव, सिम कार्ड, डेबिट और क्रेडिट कार्ड, साथ ही वित्तीय रिकॉर्ड और रजिस्टर शामिल थे।
रोहिणी में, पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया जो NGO (गैर-सरकारी संगठन) से जुड़े बैंक खातों को 'म्यूल अकाउंट' के तौर पर इस्तेमाल कर रहा था। इस मामले में 63 करोड़ रुपये से ज़्यादा की धोखाधड़ी से जुड़ी 80 से ज़्यादा शिकायतें सामने आईं।
यह पूरा ऑपरेशन गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के सहयोग से चलाया गया। यह ऑपरेशन लगभग एक महीने की खुफिया जानकारी जुटाने के बाद किया गया। इसमें हॉटस्पॉट मैपिंग, संदिग्ध लेन-देन का विश्लेषण, बैंक खातों का सत्यापन और देश भर से मिली शिकायतों के डेटा का मिलान शामिल था। I4C द्वारा दी गई रियल-टाइम एनालिटिकल सपोर्ट ने खुफिया जानकारी को कार्रवाई योग्य बनाने में अहम भूमिका निभाई।
दिल्ली पुलिस ने लोगों से एक सार्वजनिक सलाह भी जारी की है। इसमें नागरिकों से ऑनलाइन धोखाधड़ी से सावधान रहने और किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी बैंकिंग जानकारी, OTP (वन टाइम पासवर्ड) या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने का आग्रह किया गया है। पुलिस ने कहा कि साइबर अपराधियों पर लगातार दबाव बनाए रखने के लिए इसी तरह के खुफिया जानकारी पर आधारित ऑपरेशन नियमित अंतराल पर किए जाएंगे।