भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर RBI गवर्नर का बयान: चिंता की कोई बात नहीं, 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त

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आरबीआय गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है। यह भंडार 697.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार समझौते चालू और पूंजी खातों को मजबूत करेंगे। इससे भुगतान संतुलन का घाटा कम होगा। निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और मैक्रोइकॉनॉमिक फंडामेंटल्स मजबूत बने रहेंगे।

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मुंबई, 8 अप्रैल (रॉयटर्स) - भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (forex reserves) पर्याप्त है और चिंता की कोई बात नहीं है। उन्होंने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब कुछ लोग बड़ी पूंजी बाजार से पैसे निकालने ( capital market outflows ) को लेकर चिंतित थे, जिससे केंद्रीय बैंक के डॉलर भंडार में कमी आ सकती थी।

नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 3 अप्रैल तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर $697.1 बिलियन हो गया था, जो पिछले हफ्ते $688.06 बिलियन था। फरवरी के अंत में यह भंडार रिकॉर्ड $728.49 बिलियन के स्तर पर था। इसमें गिरावट मुख्य रूप से मध्य पूर्व युद्ध के कारण रुपये पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा किए गए विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप (forex intervention) के कारण आई। सोने की कीमतों में गिरावट ने भी भंडार के मूल्य को कम किया है। गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि यह भंडार कम से कम 11 महीनों के लिए पर्याप्त है, जिसे वे एक "मानक पैमाना" मानते हैं।
व्यापार समझौते चालू और पूंजी खातों को करेंगे मजबूत

गवर्नर मल्होत्रा ने यह भी कहा कि यूके सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत के व्यापार समझौतों ( trade agreements ) से देश के चालू खाते (current account) और पूंजी खाते (capital account) में सुधार होगा। इससे भुगतान संतुलन (balance of payments) का घाटा भी कम होगा। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में, भारत का चालू खाता घाटा बढ़कर $13.2 बिलियन हो गया, जो जीडीपी का 1.3% था। यह पिछले साल की इसी अवधि में $11.3 बिलियन (जीडीपी का 1.1%) से अधिक था। इसका मुख्य कारण माल व्यापार घाटे (goods trade deficit) में वृद्धि थी। इसी तिमाही में, भारत के भुगतान संतुलन में $24.4 बिलियन का घाटा दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल यह $37.7 बिलियन था।

मल्होत्रा ने कहा, "पूंजी खाते मजबूत हैं और चालू खाता काफी हद तक संभाला जा सकता है, इसलिए भुगतान संतुलन की स्थिति को लेकर कोई चिंता नहीं है।" उन्होंने आगे कहा, "प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ कई (व्यापार) समझौते हुए हैं... यह सब मदद करेगा।"

निवेशकों का भरोसा और आर्थिक मजबूती

गवर्नर ने उम्मीद जताई कि इस साल विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (foreign portfolio investment) के प्रवाह में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी (technology) और वित्तीय सेवाओं (financial services) जैसे क्षेत्रों में निवेश से मदद मिलेगी। यह तब है जब वित्तीय वर्ष 2025-26 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने रिकॉर्ड बिकवाली की थी। मल्होत्रा ने देश की मैक्रोइकॉनॉमिक फंडामेंटल्स (macroeconomic fundamentals) को मजबूत बताया।

उन्होंने कहा, "...जो लोग लंबा पैसा कमाना चाहते हैं, वे निश्चित रूप से भारत आएंगे, और जो लोग जल्दी पैसा बनाने आए हैं, वे आएंगे और चले जाएंगे।"

(रिपोर्टिंग: अश्विन मणिकांतन; संपादन: मृगांक धनीवाला)

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