ब्रिटेन का चागोस द्वीपसमूह सौंपने का फैसला: ट्रंप की आलोचना, राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल

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ब्रिटेन चागोस द्वीपसमूह मॉरीशस को सौंप रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। ब्रिटेन सरकार अपने फैसले का बचाव कर रही है। यह मामला ब्रिटेन की विदेश नीति और सुरक्षा पर बहस छेड़ रहा है। डिएगो गार्सिया द्वीप पर अमेरिका का सैन्य अड्डा है।

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लंदन, 20 जनवरी (एपी) - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अप्रत्याशित विरोध के बाद ब्रिटेन की सरकार मंगलवार को चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने के अपने फैसले का बचाव करने पर मजबूर हो गई। यह कदम तब उठाया गया जब पहले ट्रंप प्रशासन ने इस सौदे का समर्थन किया था। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर कहा कि ब्रिटेन का डिएगो गार्सिया द्वीप को मॉरीशस को सौंपने का फैसला "बिना किसी वजह के" है और यह "घोर मूर्खता का कार्य" है। उन्होंने चिंता जताई कि चीन और रूस इस "कमजोरी भरे कदम" पर ध्यान देंगे। ट्रंप ने यह भी कहा कि ब्रिटेन का यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है और इसी वजह से ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जा जरूरी है।

ट्रंप की यह तीखी प्रतिक्रिया ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के लिए एक बड़ा झटका है, जो ग्रीनलैंड को लेकर बढ़े तनाव को कम करने और अमेरिका के साथ कमजोर पड़ते संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहे थे। स्टार्मर ने पहले ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के बयानों को "पूरी तरह गलत" बताया था, लेकिन साथ ही कहा था कि इस मतभेद को "शांतिपूर्ण चर्चा के जरिये सुलझाया जाना चाहिए"।
ब्रिटेन और मॉरीशस ने मई में एक ऐतिहासिक समझौता किया था। इस समझौते के तहत, दो सदियों से ब्रिटिश नियंत्रण में रहे चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंप दी जाएगी। हालांकि, इस द्वीपसमूह का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा, डिएगो गार्सिया द्वीप, जहां अमेरिका का एक बड़ा सैन्य अड्डा है, उसे ब्रिटेन कम से कम 99 साल के लिए पट्टे पर वापस लेगा। अमेरिका सरकार ने पहले इस समझौते का स्वागत किया था और कहा था कि इससे "डिएगो गार्सिया में स्थित संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डे का दीर्घकालिक, स्थिर और प्रभावी संचालन सुनिश्चित होगा।"

ब्रिटेन के कैबिनेट मंत्री डैरेन जोन्स ने मंगलवार को इस समझौते का बचाव करते हुए कहा कि यह "अगले 100 वर्षों के लिए उस सैन्य अड्डे को सुरक्षित करेगा।" उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिटेन अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से कभी समझौता नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि इस समझौते में डिएगो गार्सिया स्थित संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डे के संचालन को पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने के लिए मजबूत प्रावधान शामिल हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य अड्डे की अनूठी क्षमताओं को बनाए रखना और "हमारे दुश्मनों को बाहर रखना" है।

हालांकि, इस समझौते का ब्रिटेन के विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया है। उनका मानना है कि द्वीपों को सौंपने से उन पर चीन और रूस जैसे देशों के हस्तक्षेप का खतरा बढ़ सकता है। समझौते को मंजूरी देने वाला विधेयक 'हाउस ऑफ कॉमन्स' (निचले सदन) में तो पारित हो गया, लेकिन ऊपरी सदन में इसका कड़ा विरोध हुआ। ऊपरी सदन ने विधेयक को पारित करने के साथ-साथ इस पर खेद व्यक्त करते हुए एक प्रस्ताव भी पारित किया। मंगलवार को इस पर आगे की चर्चा के लिए इसे सदन में फिर से प्रस्तुत किया जाएगा।

कंजर्वेटिव पार्टी की नेता केमी बैडेनोच ने इस समझौते को लेकर स्टार्मर की लेबर पार्टी सरकार की कड़ी आलोचना की। बैडेनोच ने एक पोस्ट में कहा कि ट्रंप सही हैं और स्टार्मर की "चागोस द्वीप समूह को सौंपने की योजना एक भयानक नीति है जो ब्रिटेन की सुरक्षा को कमजोर करती है तथा हमारी संप्रभुता को छीन लेती है। और तो और, यह हमें तथा हमारे नाटो सहयोगियों को हमारे दुश्मनों के सामने कमजोर बनाती है।"

संयुक्त राष्ट्र और उसकी सर्वोच्च अदालत ने भी हाल के वर्षों में ब्रिटेन से चागोस द्वीपसमूह को मॉरीशस को लौटाने का आग्रह किया है। इन अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच ब्रिटेन का यह फैसला आया है।

अमेरिका के अनुसार, डिएगो गार्सिया सैन्य प्रतिष्ठान में लगभग 2,500 सैनिक तैनात हैं, जिनमें से ज्यादातर अमेरिकी हैं। यह अड्डा मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और पूर्वी अफ्रीका में सुरक्षा अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। चागोस द्वीपसमूह 1814 से ब्रिटिश नियंत्रण में हैं, जब फ्रांस ने उन्हें ब्रिटेन को सौंप दिया था।

ट्रंप की आलोचना ने इस मुद्दे को और जटिल बना दिया है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब ब्रिटेन अमेरिका के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर भी विवादास्पद बयान दिए थे, जिसे स्टार्मर ने "पूरी तरह गलत" बताया था। ट्रंप का यह कहना कि ब्रिटेन का यह कदम "राष्ट्रीय सुरक्षा के उन कई कारणों में से एक है जिनके चलते ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जा आवश्यक है" इस बात का संकेत देता है कि वह इस मुद्दे को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ रहे हैं।

यह पूरा मामला ब्रिटेन की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ सकता है। जहां एक ओर सरकार का कहना है कि यह समझौता सैन्य अड्डे को सुरक्षित करेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा, वहीं विपक्षी दल और कुछ अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इसे ब्रिटेन की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए खतरा मान रहे हैं। ट्रंप का हस्तक्षेप इस मामले को और भी संवेदनशील बना देता है, क्योंकि अमेरिका ब्रिटेन का एक प्रमुख सहयोगी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि ब्रिटेन इस दोहरे दबाव (घरेलू विरोध और अमेरिकी राष्ट्रपति की आलोचना) का सामना कैसे करता है और चागोस द्वीपसमूह का भविष्य क्या होता है।