Haryana Exam Rules Kirpan And Mangalsutra Allowed Know New Guidelines
हरियाणा में परीक्षा: कृपाण और मंगलसूत्र पहनने की अनुमति, जानें नए नियम
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हरियाणा में परीक्षाओं को लेकर नए नियम जारी हुए हैं। अब सिख अभ्यर्थी कृपाण और विवाहित महिला अभ्यर्थी मंगलसूत्र पहनकर परीक्षा दे सकेंगी। यह फैसला अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देगा। सरकार ने सभी संबंधित विभागों को इस निर्देश का पालन करने का आदेश दिया है। यह कदम समावेशिता और सम्मान को बढ़ावा देता है।
चंडीगढ़, 20 जनवरी: हरियाणा सरकार ने परीक्षाओं के दौरान सिख अभ्यर्थियों को कृपाण और विवाहित महिला अभ्यर्थियों को मंगलसूत्र पहनने की अनुमति दे दी है। यह फैसला मंगलवार को राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए सख्त दिशानिर्देशों के तहत लिया गया है। इस कदम का उद्देश्य सिख और विवाहित महिला अभ्यर्थियों को बार-बार होने वाली परेशानियों से निजात दिलाना है। यह निर्देश विद्यालयों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और भर्ती एजेंसियों द्वारा आयोजित की जाने वाली सभी परीक्षाओं पर लागू होंगे।
मुख्य सचिव कार्यालय से जारी हुई अधिसूचना के अनुसार, सिख अभ्यर्थी निर्धारित नियमों के तहत कृपाण साथ ले जा सकेंगे। कृपाण की कुल लंबाई नौ इंच (22.86 सेमी) से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। वहीं, कृपाण की ब्लेड की लंबाई छह इंच (15.24 सेमी) से अधिक नहीं हो सकती। ऐसे अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने से कम से कम एक घंटा पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचने की सलाह दी गई है।इसी तरह, मंगलसूत्र पहनने वाली विवाहित महिला अभ्यर्थियों को भी परीक्षा के दौरान मंगलसूत्र पहनने की इजाजत होगी। उन्हें परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से कम से कम 30 मिनट पहले पहुंचना होगा।
यह महत्वपूर्ण निर्णय दिल्ली उच्च न्यायालय और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों को ध्यान में रखकर लिया गया है। इन अदालतों ने परीक्षाओं के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करते हुए धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया था।
सभी प्रशासनिक सचिवों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि उनके अधीन आने वाले विभागों, बोर्डों, निगमों, विश्वविद्यालयों और भर्ती एजेंसियों के प्रमुख इस निर्देश का पालन करें। उन्हें परीक्षा कर्मचारियों, निरीक्षकों और सुरक्षा कर्मियों को भी इस बारे में ठीक से सूचित करना होगा।
इस फैसले से अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें परीक्षा के दौरान अपनी धार्मिक पहचान से जुड़े प्रतीकों को लेकर चिंता नहीं करनी पड़ेगी। यह कदम समावेशिता और सम्मान को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
यह सुनिश्चित किया जाएगा कि परीक्षा के दौरान किसी भी अभ्यर्थी को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। नियमों का पालन करते हुए सभी को परीक्षा देने का समान अवसर मिलेगा। यह सरकार की ओर से एक संवेदनशील कदम है, जो विभिन्न समुदायों की भावनाओं का आदर करता है।