अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में झड़प: डॉक्टर घायल, आपातकालीन सेवाएं ठप, जांच जारी

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अलीगढ़ के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के बीच हिंसक झड़प हुई। इस घटना में एक डॉक्टर सहित चार लोग घायल हुए। रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने हड़ताल शुरू कर दी, जिससे आपातकालीन सेवाएं ठप हो गईं। कई गंभीर मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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अलीगढ़ के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में मंगलवार देर रात हुई एक हिंसक झड़प में एक रेजिडेंट डॉक्टर और मरीजों के परिजनों समेत कम से कम चार लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी, जिससे ट्रॉमा सेंटर में आपातकालीन सेवाएं ठप हो गईं। यह पिछले दो हफ्तों में अस्पताल में दूसरी ऐसी घटना है, जिसने आपातकालीन सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है।

आरडीए ने आरोप लगाया कि इस झड़प में एक महिला डॉक्टर सहित दो डॉक्टर घायल हुए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के एक सुरक्षा कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, शबाना बेगम नाम की मरीज के एक रिश्तेदार, मोहम्मद अरीब ने डॉक्टर पर उनसे बदसलूकी करने का इल्जाम लगाया है। अरीब ने पत्रकारों से कहा, “उसने (डॉक्टर ने) गाली-गलौज करना शुरू कर दिया और जल्द ही अन्य डॉक्टर भी उन पर हमलावर हो गए।” इस हंगामे के कारण कई गंभीर रूप से बीमार मरीजों को आपातकालीन इलाज के बिना ही लौटना पड़ा।
एएमयू प्रॉक्टर नावेद खान ने बताया कि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और हालात को काबू में करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “हमने दोनों मरीजों के परिवारों और रेजिडेंट डॉक्टर से बयान ले लिए हैं। पूरे मामले की जांच चल रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।” खान ने यह भी बताया कि स्थिति की समीक्षा के लिए विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक चल रही है। पुलिस ने बताया कि दोनों पक्षों ने सिविल लाइंस थाने में शिकायत दर्ज कराई है और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

यह घटना अस्पताल में डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है। आरडीए की हड़ताल से सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को हो रही है जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत है। अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच का भरोसा दिलाया है, लेकिन देखना यह होगा कि कब तक स्थिति सामान्य हो पाती है और मरीजों को राहत मिलती है। इस तरह की घटनाएं स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती हैं।

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