Tata Group Leadership Dispute Shares Fall Uncertainty Over Tata Sons Listing
टाटा ग्रुप में नेतृत्व विवाद: टाटा संस के लिस्टिंग प्लान पर अनिश्चितता, शेयर गिरे
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टाटा ग्रुप के शेयरों में गिरावट, चेयरमैन की नियुक्ति पर विवाद गहराया
नई दिल्ली, 21 सितंबर (ANI): सोमवार को शेयर बाजार में टाटा ग्रुप के ज्यादातर शेयरों में गिरावट देखी गई। इसकी वजह टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच चेयरमैन की नियुक्ति और कंपनी की भविष्य की संरचना को लेकर बढ़ा विवाद है। निवेशक इस बात पर नजरें गड़ाए हुए हैं कि क्या यह मामला कानूनी लड़ाई तक पहुंचेगा और टाटा संस के लिस्टिंग (शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने) की योजनाओं को लेकर अनिश्चितता फिर से बढ़ सकती है।सोमवार दोपहर 12:24 बजे तक, टाटा कैपिटल के शेयर करीब 3 फीसदी गिरकर 341 रुपये पर आ गए। वहीं, टाटा पावर के शेयर 2.5 फीसदी लुढ़ककर 365.55 रुपये पर पहुंच गए। टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन के शेयर 2.3 फीसदी गिरकर 685.90 रुपये पर थे, जबकि टाटा टेक्नोलॉजीज 2.2 फीसदी की गिरावट के साथ 707 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। टाटा एलक्सी के शेयर 2 फीसदी गिरकर 3,268 रुपये पर आ गए, जो पिछले 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के शेयर करीब 1 फीसदी गिरकर 301 रुपये पर थे, और टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स भी 1 फीसदी नीचे थे। टाटा कम्युनिकेशंस 1.5 फीसदी की गिरावट के साथ 1,746.80 रुपये पर थे, और टाटा टेलीसर्विसेज 1.4 फीसदी गिरकर 35.25 रुपये पर थे।
बाजार में इस नकारात्मक माहौल के बावजूद, निफ्टी 50 की एक बड़ी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) हरे निशान में कारोबार कर रही थी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर इसके शेयर करीब 1 फीसदी बढ़कर 2,122.50 रुपये पर थे।
इस विवाद की जड़ टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की फिर से नियुक्ति का मामला है। 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड ने 4:1 के वोट से चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए फिर से चेयरमैन बनाने का फैसला किया था। लेकिन टाटा ट्रस्ट्स ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा कि इस फैसले के खिलाफ एक निदेशक ने वोट दिया था। ट्रस्ट्स का आरोप है कि इसके बावजूद, टाटा संस के बोर्ड ने चेयरमैन के निर्णायक वोट (casting vote) के आधार पर चंद्रशेखरन को फिर से नियुक्त करने का फैसला कर लिया।
टाटा ट्रस्ट्स, जिसके पास टाटा संस की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है, इस फैसले की वैधता पर सवाल उठा रहा है। ट्रस्ट्स का कहना है कि टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (कंपनी के नियम) के मुताबिक, ट्रस्ट द्वारा नामित निदेशकों के बहुमत का सकारात्मक समर्थन जरूरी है। चूंकि ट्रस्ट के दो नामित निदेशकों में से एक ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया था, इसलिए ट्रस्ट का मानना है कि यह शर्त पूरी नहीं हुई और चेयरमैन का निर्णायक वोट इसे बदल नहीं सकता।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब टाटा संस को अपनी संभावित लिस्टिंग को लेकर फिर से दबाव का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने टाटा संस के एक प्राइवेट कंपनी के तौर पर बने रहने के अनुरोध को खारिज कर दिया था। इस फैसले से ग्रुप की होल्डिंग कंपनी के भविष्य के मालिकाना हक और उसकी संरचना पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं।
इन घटनाओं के चलते टाटा ग्रुप के शेयरों में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों की नजरें नेतृत्व विवाद, कंपनी के गवर्नेंस (प्रबंधन) के तरीकों और टाटा संस की लिस्टिंग योजनाओं से जुड़ी नई घोषणाओं पर रहेंगी।