मुंबई में बीएमसी चुनावों की सरगर्मी तेज हो गई है। जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आ रही हैं, वैसे-वैसे नेताओं के रंग बदलने का सिलसिला भी तेज हो गया है। यह रंग बदलने का खेल इतना आम हो गया है कि गिरगिट भी हैरान है। गिरगिट को हमेशा से अपनी रंग बदलने की कला पर घमंड था, लेकिन अब उसे समझ आ रहा है कि राजनीति में उसके भी "बाप" मौजूद हैं। बड़े नेताओं की बात छोड़िए, गली-कूचे के छोटे नेता भी गिरगिट को मात दे रहे हैं।हाल ही में एक ऐसे ही छुटभैया नेता का मामला सामने आया, जिसने तीन दिनों में तीन बार दल बदला। रविवार की सुबह, उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि उनकी पार्टी अब वैसी नहीं रही, जैसी पहले थी, इसलिए वे दूसरी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। समर्थकों ने उनका पूरा साथ दिया और "नेता जी आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं" के नारे लगाए। लेकिन सोमवार को ही नेता जी के हाथों में एक दूसरी पार्टी का झंडा दिखाई देने लगा। समर्थकों को लगा कि यह विरोधियों की चाल है, लेकिन नेता जी के ऑफिस की नई सजावट से साफ हो गया कि यह नेता जी की ही करामात है। उन्होंने फिर से दल बदल लिया था।
हैरत की बात तो यह थी कि मंगलवार की शाम को फिर से हवा का रुख बदल गया। नेता जी अपने समर्थकों के बीच पहुंचे और मुस्कुराते हुए कहने लगे कि उन्होंने जल्दबाजी में गलत फैसला लिया था। उनकी पुरानी पार्टी उनके लिए फिर से वैसी ही हो गई है, जैसी पहले थी। यानी, उन्होंने फिर से अपनी पुरानी पार्टी में वापसी कर ली थी।
नेता जी के इस रंग बदलने के खेल से भले ही गिरगिट हैरान हो, लेकिन उनके समर्थक एकदम कूल हैं। उन्हें पहले दिन से ही पता है कि नेता जी कितने बड़े कलाकार हैं। उनका एकमात्र मिशन सिर्फ पैसा कमाना है, और वे इसमें सफल भी हो रहे हैं। जब नेता जी अपनी पुरानी पार्टी के प्रति वफादारी जता रहे थे, उसी समय उनका एक समर्थक दूसरे समर्थक के कान में फुसफुसा रहा था, "इन तीन दिनों में नेता जी ने अपनी तीन पीढ़ियों के लिए माल इकट्ठा कर लिया है..."। यह बात नेता जी के असली मकसद को साफ करती है।
यह घटना मुंबई की राजनीति में नेताओं के दल बदलने की प्रवृत्ति को दर्शाती है। चुनावों के नजदीक आते ही ऐसे वाकये आम हो जाते हैं, जहां नेता अपने फायदे के लिए किसी भी पार्टी में शामिल हो जाते हैं और फिर मौका मिलते ही दूसरी पार्टी में चले जाते हैं। समर्थकों को ऐसे नेताओं पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है, लेकिन वे फिर भी उनके साथ खड़े रहते हैं, शायद इसलिए क्योंकि उन्हें भी पता होता है कि नेता जी का असली मकसद क्या है।

