मद्रास हाई कोर्ट ने अराजकता को समाप्त करने का आदेश दिया, 11 अतिक्रमणों की पहचान की गई

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मद्रास हाई कोर्ट ने शिवगंगई जिले के सिरुकनावायल गांव में अरट्टनी कण्मोई से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने तहसीलदार को सभी 11 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर चार महीने के भीतर अवैध कब्जे हटाने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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मदुरै: मद्रास हाई कोर्ट ने शिवगंगई जिले के सिरुकनावायल गांव में स्थित अरट्टनी कण्मोई (तालाब) से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह फैसला पी. कट्टूराजन की याचिका पर सुनाया, जिसमें उन्होंने अधिकारियों को अतिक्रमण हटाने का निर्देश देने की मांग की थी। जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन और जस्टिस बी. पोगलेंदी की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने तहसीलदार की रिपोर्ट का ध्यान आकर्षित किया है। रिपोर्ट के अनुसार, पहले ही सर्वे हो चुका है और 11 अतिक्रमण पाए गए हैं। जजों ने इस बात पर दुख जताया कि अतिक्रमणों की पहचान के बाद भी उन पर कार्रवाई नहीं हुई। ऐसा लगता है कि निगरानी समिति अपने काम में नाकाम रही। इसलिए, जजों ने तहसीलदार को सभी अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी करने और चार महीने के भीतर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है।

यह मामला अरट्टनी कण्मोई में हो रहे अवैध कब्जों से जुड़ा है। कोर्ट ने पाया कि तहसीलदार की रिपोर्ट में 11 अतिक्रमणों का जिक्र है, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जजों ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पहचान के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाए गए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि निगरानी समिति को इस काम की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हुई। इसलिए, अब तहसीलदार को सीधे तौर पर कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है।

तहसीलदार को निर्देश दिया गया है कि वे सभी अतिक्रमणकारियों को नोटिस भेजें। इसके बाद, चार महीने के अंदर तालाब से सभी अवैध कब्जों को हटाना होगा। यह फैसला तालाब को उसके मूल स्वरूप में लाने और जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।