फाइल हुई ‘चोरी’, ओमीक्रॉन-2 के विकास की टूट गई ‘डोरी’

नवभारत टाइम्स

ग्रेटर नोएडा के ओमिक्रॉन-2 सेक्टर में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। तीन साल से पार्कों का रखरखाव नहीं हुआ है। मार्केट और कम्युनिटी सेंटर की कमी से निवासी परेशान हैं। टूटी बाउंड्री वॉल और फेंसिंग न होने से चोरी की घटनाएं बढ़ी हैं। प्राधिकरण की अनदेखी के कारण सेक्टर की स्थिति बिगड़ रही है।

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ओमिक्रॉन-2 सेक्टर , जो कभी अपनी शानदार लोकेशन और हरियाली के लिए जाना जाता था, आज ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की घोर उपेक्षा का शिकार है। करीब 10 हजार की आबादी वाले इस सेक्टर में तीन साल से पार्कों और ग्रीन बेल्ट का रखरखाव पूरी तरह ठप है, जिसका टेंडर तक जारी नहीं हुआ है। बुनियादी सुविधाओं का भारी संकट है, जिससे निवासी बाजार, मेडिकल सुविधाओं और कम्युनिटी सेंटर के अभाव में भटकने को मजबूर हैं। टूटी बाउंड्री वॉल और फेंसिंग की कमी ने चोरी की घटनाओं को बढ़ावा दिया है, जबकि बंद पड़े मकानों में सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीव पनप रहे हैं। निवासियों का कहना है कि अगर जल्द ही विकास कार्य शुरू नहीं हुए तो वे आंदोलन करेंगे।

ग्रेटर नोएडा का ओमिक्रॉन-2 सेक्टर, जो कभी अपनी बेहतरीन लोकेशन और हरियाली के लिए एक मॉडल सेक्टर माना जाता था, आज प्राधिकरण की अनदेखी के कारण बुरी तरह जूझ रहा है। इस सेक्टर में लगभग 10 हजार लोग रहते हैं। उन्हें पानी और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाएं तो मिल गईं, लेकिन पिछले तीन सालों से रखरखाव के नाम पर यहां कुछ भी खर्च नहीं किया गया है। जब निवासी अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों के पास जाते हैं, तो उन्हें जवाब मिलता है कि सेक्टर के रखरखाव से जुड़ी फाइल चोरी हो गई है। यह स्थिति सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत, यानी 20 से अधिक विकसित पार्कों और बड़ी ग्रीन बेल्ट को भी बर्बाद कर रही है।
आज ये पार्क असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गए हैं और गंदगी से भरे पड़े हैं। तीन सालों से रखरखाव का टेंडर जारी न होने के कारण, पार्कों में झाड़ियां इंसानों से भी ऊंची हो गई हैं। लाइटें बंद पड़ी हैं और झूले टूट चुके हैं। हॉर्टिकल्चर विभाग ने भले ही पेड़ों की छंटाई की हो, लेकिन कटी हुई भारी टहनियों को हफ्तों तक सड़कों पर ही छोड़ दिया गया। इस वजह से अंधेरे में कार और बाइक सवार इनसे टकराकर चोटिल हो रहे हैं। प्राधिकरण सफाई के नाम पर हादसों को दावत दे रहा है।

सेक्टर में 90, 120 और 250 वर्गमीटर के हजारों घर बन चुके हैं। लेकिन, रोजमर्रा की जरूरत की चीजें खरीदने के लिए निवासियों को आज भी 2 से 4 किलोमीटर दूर दूसरे सेक्टरों में जाना पड़ता है। बाजार और मदर डेयरी के लिए आरक्षित जमीन खाली पड़ी है, लेकिन वहां निर्माण का कोई नामोनिशान नहीं है। शादी-ब्याह या किसी भी सामाजिक कार्यक्रम के लिए कम्युनिटी सेंटर न होने के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। उन्हें किराए पर महंगे हॉल बुक करने पड़ते हैं।

सुरक्षा की स्थिति भी चिंताजनक है। सेक्टर की बाउंड्री वॉल कई जगहों से जर्जर होकर टूट चुकी है। कंटीले तारों की फेंसिंग न होने के कारण चोरों के हौसले बुलंद हैं। सैकड़ों बंद पड़े मकान अब कूड़ाघर बन गए हैं। इन मकानों में उगी झाड़ियों के कारण सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीव पनप रहे हैं, जो निवासियों के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। इन बंद पड़े मकानों में अवैध रूप से लोग भी रह रहे हैं, जिससे चोरी की घटनाएं बढ़ गई हैं। सुरक्षा को मजबूत करने के लिए फेंसिंग और सख्त पहरा बहुत जरूरी है। गंदगी और दुर्गंध से जीना मुश्किल हो गया है।

निवासियों ने प्राधिकरण के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। सुरेंद्र चौधरी ने कहा, "सेक्टर में शादी-ब्याह के लिए कम्युनिटी सेंटर नहीं है। लोगों को भारी खर्च कर दूसरे सेक्टर जाना पड़ता है। करीब 10 हजार आबादी के बावजूद बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। प्राधिकरण को यहां जल्द सेंटर बनाना चाहिए।"

रविंद्र सिंह ने कहा, "सेक्टर में हरियाली तो बहुत है, लेकिन रखरखाव शून्य है। तीन साल से पार्कों का मेंटिनेंस नहीं हुआ। लाइटें खराब हैं और बाउंड्री वॉल टूटी पड़ी है। प्राधिकरण को पार्कों के सौंदर्यीकरण और सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए।"

मोनिका, जो RWA की अध्यक्ष हैं, ने कहा, "शिकायतों के बावजूद अधिकारी सुनवाई नहीं करते। वे कहते हैं कि मेंटिनेंस की फाइल खो गई है। तीन साल से टेंडर न होना प्राधिकरण की बड़ी लापरवाही है। फाइलों का बहाना बनाकर हमें बुनियादी हक से वंचित रखा जा रहा है।"

कश्मीर सिंह ने बताया, "हॉर्टिकल्चर विभाग ने पेड़ों की छंटाई तो की, लेकिन टहनियां सड़कों पर ही छोड़ दीं। इससे आए दिन बाइक और कार सवार टकराकर चोटिल हो रहे हैं। प्राधिकरण सफाई के नाम पर हादसों को दावत दे रहा है।"

आनंद शर्मा ने कहा, "20 से अधिक पार्कों की हालत जर्जर है। तीन साल से कोई टेंडर नहीं हुआ। पूछने पर जवाब मिलता है कि फाइल चोरी हो गई है। टूटे झूले और खराब लाइटों के कारण पार्कों में जाना दूभर हो गया है।"

दीपक चौहान ने अपनी समस्या बताते हुए कहा, "सेक्टर में मार्केट और मदर डेयरी के लिए जगह खाली है, पर सुविधा नहीं। दूध और दवाई के लिए 2-4 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। इतनी बड़ी आबादी को बुनियादी चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।"

एनएस नेगी ने सुरक्षा पर चिंता जताते हुए कहा, "बाउंड्री वॉल कई जगह से टूटी है और तार फेंसिंग गायब है। बंद मकानों में अवैध रूप से लोग रह रहे हैं, जिससे चोरियां बढ़ गई हैं। सुरक्षा पुख्ता करने के लिए फेंसिंग और सख्त पहरा बहुत जरूरी है।"

ओंकार तिवारी ने बंद पड़े मकानों की समस्या को उठाते हुए कहा, "लंबे समय से बंद पड़े मकान अब कूड़ाघर और जंगल बन चुके हैं। इनमें जहरीले जीव-जंतु पनप रहे हैं, जो पड़ोसियों के लिए खतरा हैं। गंदगी और दुर्गंध से जीना मुहाल है। प्राधिकरण को इन पर कार्रवाई करनी चाहिए।"

निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही चोरी हुई फाइल ढूंढकर विकास कार्य शुरू नहीं किए गए, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। वे प्राधिकरण से मांग कर रहे हैं कि सेक्टर की बुनियादी सुविधाओं को सुधारा जाए और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए।