Khameneis Death In Iran New Challenge For America Fear Of Escalating Conflict
बात बिगड़ न जाए
नवभारत टाइम्स•
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अब नहीं रहे। अमेरिका ने उन पर हमले का आदेश दिया था। उनके जाने के बाद भी अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष जारी रह सकता है। अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर बनाया गया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की भूमिका बढ़ने की उम्मीद है।
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के बीच ही अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले का आदेश दे दिया। यह हमला ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद हुआ, जिन्हें ट्रंप अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते थे। हालांकि, खामेनेई के जाने के बाद भी अमेरिका के लिए यह लड़ाई खत्म होने की उम्मीद कम है, क्योंकि ईरान की सत्ता का सिस्टम अब भी वही है और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भूमिका और बढ़ने वाली है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। यह घटना ऐसे समय में हुई जब दोनों देशों के बीच शांति वार्ता चल रही थी। ट्रंप प्रशासन ने ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन उनका असली निशाना खामेनेई थे, जिनकी मौत की कामना ट्रंप खुलेआम करते थे। खामेनेई का ईरान की राजनीति पर करीब पांच दशकों का गहरा प्रभाव रहा है। शाह के विरोध से लेकर सुप्रीम लीडर बनने तक, उन्होंने ईरान को अमेरिका के खिलाफ खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई।ईरानी मीडिया के अनुसार, अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर चुना गया है। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक स्थायी नेता का चुनाव नहीं हो जाता। खामेनेई के बेटे मोजतबा का नाम भी सर्वोच्च पद के लिए चर्चा में है, हालांकि वह अभी तक अयातुल्ला के पद तक नहीं पहुंचे हैं। इस बदली हुई परिस्थिति में, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ताकत और बढ़ने की संभावना है। खामेनेई ने ही IRGC को खड़ा किया था और नेतृत्व के स्तर पर झटका लगने के बावजूद, IRGC की ताकत अभी भी कायम है। इसका सबूत खाड़ी क्षेत्र में तेज हुए हमलों से मिलता है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट में ऑयल टैंकरों को निशाना बनाया गया।
ट्रंप ने ईरान की जनता का जिक्र करते हुए हमले का बचाव किया, लेकिन अमेरिका में ही इस हमले के खिलाफ प्रदर्शन हुए। यह दिखाता है कि ईरान की जनता का एक वर्ग सत्ता के खिलाफ गुस्से के बावजूद खामेनेई के साथ था। अमेरिका का अपना इतिहास भी उसके पक्ष में नहीं है। जिन देशों में उसने सत्ता परिवर्तन कराया, वहां हालात अक्सर पहले से बदतर हुए हैं। ईरान के मामले में भी यह डर है कि कहीं पूरा इलाका लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष में न घिर जाए।
खामेनेई का ईरान पर प्रभाव करीब पांच दशकों तक रहा। वह शाह के विरोधी थे और अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के सबसे करीबी सहयोगी थे। उन्होंने पहले राष्ट्रपति और फिर सुप्रीम लीडर के रूप में ईरान की दिशा तय की। जैसे-जैसे वह मजबूत होते गए, अमेरिका के साथ उनका टकराव भी बढ़ता गया। ट्रंप उन्हें अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते थे। उनके जाने के बाद, ईरान और बाकी दुनिया के लिए यह एक बड़ा सवाल है कि अब आगे क्या होगा।
ईरानी मीडिया के मुताबिक, अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर चुना गया है। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक स्थायी नेता का चुनाव नहीं हो जाता। सर्वोच्च पद के लिए खामेनेई के बेटे मोजतबा का नाम भी चर्चा में है, लेकिन वह अभी तक अयातुल्ला के पद तक नहीं पहुंचे हैं। यह तय लग रहा है कि बदली हुई परिस्थितियों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भूमिका और ज्यादा बढ़ने वाली है।
ट्रंप चाहते थे कि ईरान की सत्ता से खामेनेई हट जाएं, और वह हो गया। लेकिन, ईरान का सिस्टम अब भी पुराना ही है। IRGC को खामेनेई ने खड़ा किया था। नेतृत्व के स्तर पर उसे झटका जरूर लगा है, पर उसकी ताकत अब भी कायम है। पूरे खाड़ी क्षेत्र में हमले तेज करके उसने इसका सबूत दिया है। होर्मुज स्ट्रेट में भी ऑयल टैंकरों को निशाना बनाया गया।
ईरान की बात करते हुए ट्रंप हमेशा वहां की जनता का जिक्र करते हैं। हालांकि, हकीकत यह है कि ईरान पर हमले के विरोध में अमेरिका में ही प्रदर्शन हुए। सत्ता के खिलाफ गुस्से के बावजूद, ईरान की जनता का एक तबका खामेनेई के साथ था। वैसे, अमेरिका का खुद का अतीत भी उसके पक्ष में नहीं है। जिन देशों में उसने सत्ता परिवर्तन कराया, वहां हालात पहले से बदतर हो गए। ईरान को लेकर भी यह डर है कि कहीं पूरा इलाका लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष में न घिर जाए।