मध्य प्रदेश खाद्य सुरक्षा: एक में से तीसरे खाद्य नमूनों में मानक की कमी

TOI.in

मध्य प्रदेश में खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले छह महीनों में, हर 30 में से 1 खाद्य नमूना जांच में घटिया या मिलावटी पाया गया है। यह खुलासा राज्य में पहले से चल रहे जहरीली दवाओं के मामलों के बीच हुआ है।

big question on food safety in madhya pradesh adulteration found in every third sample
भोपाल: मध्य प्रदेश में खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल उठा है। पिछले छह महीनों में, हर 30 में से 1 फूड सैंपल जांच में घटिया या मिलावटी पाया गया है। यह खुलासा तब हुआ है जब राज्य पहले से ही जहरीली दवाओं के मामलों से जूझ रहा है, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

मध्य प्रदेश फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (MP-FDA) ने 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच पूरे राज्य में 9,827 कानूनी सैंपल और 12,214 निगरानी सैंपल इकट्ठा किए। इनमें से 5,262 कानूनी सैंपल की जांच हुई, जिसमें 173 सैंपल गुणवत्ता और मात्रा के दावों पर खरे नहीं उतरे। कानूनी सैंपल वे होते हैं जिन्हें जांच के लिए लिया जाता है और अगर उनमें कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो उस पर तुरंत कानूनी कार्रवाई होती है। ये सैंपल ही फूड सेफ्टी नियमों के तहत केस चलाने का आधार बनते हैं।
MP-FDA के सीनियर फूड सेफ्टी ऑफिसर DK Verma ने बताया कि इन छह महीनों में कुल 36 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है और कई लाइसेंस भी रद्द किए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि लैब जांच में खाने-पीने की चीजों में मिलावट की पुष्टि होने के बाद, संबंधित चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट में केस दर्ज किया जाता है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वालों को छह महीने तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

MP-FDA कमिश्नर दिनेश श्रीवास्तव ने हाल ही में हुई एक समीक्षा बैठक में इस बात पर जोर दिया कि विभाग मिलावट के मामले में 'जीरो-टॉलरेंस' की नीति अपनाता है। यानी, मिलावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब राज्य पहले से ही जहरीली दवाओं के मामलों से परेशान है, जिससे खाने-पीने की चीजों की सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर चिंताएं और भी बढ़ गई हैं। यह दिखाता है कि मिलावटखोरों पर नकेल कसना कितना जरूरी है ताकि आम जनता को सुरक्षित और शुद्ध चीजें मिल सकें।