गुजरात में 17 वर्षीय लड़के के साथ पुलिस द्वारा हिरासत में अमानवीय व्यवहार: NHRC ने दिया नोटिस

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राजकोट में एक 17 वर्षीय लड़के के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गुजरात के पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह घटना 1 सितंबर को गांधीग्राम पुलिस स्टेशन में हुई थी।

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राजकोट में एक 17 साल के लड़के के साथ कथित तौर पर हिरासत में मारपीट का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गुजरात के पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो हफ्ते के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह घटना 1 सितंबर को राजकोट के गांधीग्राम पुलिस स्टेशन में हुई थी।

मानवाधिकार आयोग ने मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा है कि अगर रिपोर्ट सच है, तो यह पीड़ित के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। यह मामला 6 अक्टूबर को तब सामने आया जब एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में एक आदमी लड़के के सिर से बाल खींचता हुआ दिख रहा है, जबकि दूसरा पुलिसकर्मी वीडियो बना रहा है।
इस मामले में लड़के की 55 वर्षीय दादी की शिकायत पर कार्रवाई हुई है। दादी को यह वीडियो क्लिप मिला था। गांधीग्राम पुलिस स्टेशन के एक कांस्टेबल सहित दो लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 115(2) (लोक सेवक द्वारा अवैध कार्य के लिए उकसाना) और 198 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम की धारा 75, जो बच्चों के प्रति क्रूरता से संबंधित है, के तहत भी कार्रवाई की गई है।

एफआईआर के अनुसार, 1 सितंबर की रात को लड़के को शैलेश नाम के एक व्यक्ति ने पीटा था। शैलेश ने उसके बाल खींचे और सिर पर चोट पहुंचाई। आरोप है कि लड़के की हिरासत के प्रभारी कांस्टेबल प्रदीप डांगर ने हस्तक्षेप नहीं किया, बल्कि अपने मोबाइल फोन से इस कृत्य को रिकॉर्ड किया। इस तरह उन्होंने अपराध को बढ़ावा दिया। एफआईआर में यह भी कहा गया है कि यह मारपीट गांधीग्राम पुलिस स्टेशन के एक कमरे के अंदर हुई थी।

शिकायत के मुताबिक, यह घटना एक दिन पहले, 31 अगस्त को हुई एक झड़प का नतीजा थी। उस दिन नाबालिग और तेजस डांगर नाम के एक युवक के बीच कहासुनी हुई थी, जिसमें तेजस को चाकू लग गया था। इस घटना के बाद, लड़के और उसके दोस्तों पर उसी पुलिस स्टेशन में मारपीट और दंगे का मामला दर्ज किया गया था। लड़के को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था और बाद में गोंडल रोड पर एक किशोर सुधार गृह भेजा गया था। करीब दो हफ्ते बाद उसे जमानत पर रिहा किया गया।

लड़के की दादी ने बताया कि उन्होंने हाल ही में वायरल वीडियो देखा जिसमें उनके पोते को पीटा जा रहा था। वीडियो में उसके बाल खींचे जा रहे थे और कूड़ेदान में फेंके जा रहे थे। लड़के ने भी वीडियो की पुष्टि की और शैलेश को हमलावर और कांस्टेबल डांगर को घटना के समय मौजूद बताया।

यह घटना राजकोट शहर में हुई। मानवाधिकारों के उल्लंघन के इस गंभीर मामले पर आयोग की पैनी नजर है। गुजरात पुलिस से दो हफ्ते में जवाब मांगा गया है। यह मामला बच्चों के साथ पुलिसिया बर्बरता और हिरासत में दुर्व्यवहार के गंभीर सवाल खड़े करता है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद ही इस मामले ने तूल पकड़ा है।

यह घटना दर्शाती है कि कैसे कानून के रखवाले ही कानून तोड़ने में शामिल हो सकते हैं। कांस्टेबल का वीडियो बनाना और मारपीट को रोकना नहीं, यह दर्शाता है कि वे अपनी ड्यूटी से कितना दूर थे। किशोर न्याय अधिनियम के तहत बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन यहां तो एक नाबालिग को ही निशाना बनाया गया।

इस तरह की घटनाएं समाज में डर पैदा करती हैं और पुलिस की छवि को धूमिल करती हैं। उम्मीद है कि NHRC की दखलंदाजी के बाद इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों को सजा मिलेगी। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और हिरासत में सभी के मानवाधिकारों का सम्मान हो।